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देश

रवीश कुमार ने भी दिया NDTV से इस्तीफा, अब देखने को नही मिलेगा Prime Time

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रवीश कुमार

Ravish Kumar Resigns from NDTV: NDTV से वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया है। इससे एक दिन पहले प्रणय रॉय (Prannoy Roy) और उनकी पत्नी राधिका रॉय (Radhika Roy) ने एनडीटीवी बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। कुमार चैनल के प्रमुख शो हम लोग, रवीश की रिपोर्ट, देश की बात और प्राइम टाइम सहित कई कार्यक्रमों को होस्ट करते थे।

एनडीटीवी ग्रुप (NDTV Group) की प्रेसिडेंट सुपर्णा सिंह (President Suparna Singh) ने कहा, “कुछ ही पत्रकार ऐसे हैं, जिन्होंने रविश जितना प्रभाव लोगों पर छोड़ा। उनके बारे में लोगों की प्रतिक्रियाओं की ढेर में; भीड़ में उनके लिए जुटने वाले लोगों, भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मिले प्रतिष्ठित पुरस्कारों और पहचान; और अपनी दैनिक रिपोर्ट में, जो उन लोगों के अधिकारों और जरूरतों को पूरा करता है जो सेवा से वंचित हैं, में यह साफ झलकता है।”

रवीश कुमार को दो बार गोयनका और एक बार रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड मिल चुका है

रवीश कुमार (Ravish kumar) के जाने की घोषणा करते हुए, चैनल ने एक आंतरिक मेल में कहा कि उनका इस्तीफा तत्काल रूप से प्रभावी है। यानी अब रवीश कुमार एनडीटीवी के लिए शो Prime Time करते हुए नजर नहीं आएंगे। रवीश कुमार को उनकी पत्रकारिता के लिए दो बार रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड और 2019 में रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

बिहार के छोटे से गांव से निकलकर दिल्ली आए थे रवीश

पत्रकार रवीश कुमार का जन्म 5 दिसम्बर 1974 को बिहार के पूर्व चंपारन जिले के मोतिहारी के एक छोटे से गांव जितवारपुर में हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई लोयोला हाई स्कूल, पटना से हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा को प्राप्त करने के लिए वे दिल्ली आए। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और इसके बाद भारतीय जन संचार संस्थान से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर का डिप्लोमा प्राप्त किया।

बता दें कि NDTV के मालिक और संस्थापक प्रणय और उनकी पत्नी राधिका रॉय ने भी मंगलवार (29 नवंबर 2022) को एनडीटीवी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था।

बीएसई (BSE) के साथ किए गए एक नियामक फाइलिंग में इसकी जानकारी दी गई। प्रणय रॉय और राधिका रॉय के इस्तीफा देने के तुरंत बाद कंपनी के बोर्ड में तीन नए निदेशक नियुक्त किए गए। इनमें अडानी समूह के सीईओ सुदीप्त भट्टाचार्य, संजय पुगलिया और सेंथिल सिन्नैया चेंगलवारायण शामिल हैं।

साल 1988 में डाली थी NDTV की नींव

1988 में प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने एनडीटीवी की नींव रखी थी। शुरुआत में प्रणव रॉय दूरदर्शन पर ‘द वर्ल्ड दिस वीक’ (The World This Week) नाम का कार्यक्रम लेकर आते थे, जिसने उन दिनों काफी लोकप्रियता हासिल की थी।

करीब 11 साल बाद 1998 में उन्होंने स्टार न्यूज के साथ मिलकर देश के पहले 24 घंटे के न्यूज चैनल की शुरुआत की। उन दिनों NDTV, स्टार न्यूज के लिए प्रोडक्शन का काम करता था। तब बीबीसी का 80 प्रतिशत कंटेंट भी NDTV ही तैयार करता था। बाद में दोनों मीडिया हाउस अलग हो गए।

Politics

झंडे बनाने के बाद अब गेहूं काटते हुए नजर आए योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर

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गेहूं की कटाई करते हुए ओमप्रकाश राजभर

चुनाव आते ही वोटरों को लुभाने के लिए नेता ऐसे-ऐसे काम करने लग जाते हैं जो आपने सपने में भी नही सोचा होगा। इस क्रम में नेता वे सारे काम करते दिख रहे हैं जो शायद ही कभी किए हों। अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर खेत में कटाई करते दिख रहे हैं। इस वीडियो में अपने कार्यकर्ताओं और मीडिया के कैमरे के फोकस के हिसाब से राजभर गेहूं काट रहे हैं। साथ ही ओम प्रकाश ये भी कहते दिख रहे हैं कि ये सब करके छोड़ दिया है।

फुर्ती से गेहूं काटते दिख रहे राजभर

जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश के घोसी लोकसभा क्षेत्र में ग्राम सभा मुहम्मदपुर के बरहिया ब्लॉक रतनपुरा जनपद मऊ में प्रचार के दौरान ओम प्रकाश राजभर अचानक अपना काफिला रोककर एक खेत खलिहान में पहुंच गए। इसके बाद  कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हंसिया लेकर गेहूं काटने लगे। हालांकि गौरकरने वाली बात ये है कि राजभर इस वीडियो में अच्छी-खासी फुर्ती से गेहूं काटते दिख रहे हैं और साथ ही ये भी कह रहे हैं कि ये सब काम करके छोड़ दिया है।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले ओमप्रकाश राजभर का एक और वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो अपनी पार्टी झंडे खुद बनाते हुए नजर आ रहे थे। उनके उस वीडियो पर भी लोगों ने खूब कमेंट किये थे।

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देश

असम में 88 साल पुराने मुस्लिम विवाह अधिनियम को सरकार ने किया रद्द

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असम।  भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार की हेमंत बिस्वा सरमा मुस्लिम विवाह अधिनियम और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को रद्द कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस कानून के दायरे में मुस्लिमों की लगभग एक तिहाई आबादी (35%) थी। बीते शुक्रवार को कैबिनेट मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि उन्होंने 88 साल पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को रद्द कर दिया है।

हेमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा ने बैठक के बाद सोशल मीडिया साइट एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि असम कैबिनेट ने सदियों पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम को निरस्त करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इस अधिनियम में विवाह पंजीकरण की अनुमति देने वाले प्रावधान शामिल थे, भले ही दूल्हा और दुल्हन 18 और 21 वर्ष की कानूनी उम्र तक नहीं पहुंचे हों, जैसा कि कानून द्वारा आवश्यक है। यह कदम असम में बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

असम के कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने एक प्रेस वार्ता में असम मुस्लिम विवाह और तलाक अधिनियम 1935 को निरस्त करने और यूसीसी को मंजूरी देने के बारे में बात की। बरुआ ने इसे “बहुत महत्वपूर्ण निर्णय” बताया और कहा, “माननीय मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि हम समान नागरिक संहिता की ओर जा रहे हैं, इसलिए आज एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, वह है असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम , 1935, निरस्त कर दिया जाएगा और कोई भी मुस्लिम विवाह या तलाक अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आगे इस अधिनियम की आलोचना करते हुए दावा किया कि यह बाल विवाह को अनुमति देता है, और तर्क दिया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का लंबे समय से बाल विवाह को खत्म करने का लक्ष्य था, उन्होंने कहा, “यह पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष की स्वीकार्य आयु से पहले विवाह को पंजीकृत करने की गुंजाइश प्रदान करता है।”

 

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उत्तरप्रदेश

केजरीवाल के बाद अब अखिलेश को घेरने में जुटी BJP‚ दस साल पुराने में मामले CBI ने भेजा समन

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी एक-एक करके सभी विपक्षी दलों पर कानूनी शिकंजा कसती जा रही है‚ ताकि चुनाव में कोई उसे टक्कर न दे सके। कांग्रेस‚ टीएमसी‚ झामुमो और आम आदमी पार्टी के बाद अब निशाने पर यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को उन्हे अवैध खनन मामले में समन भेजा है। CBI ने अखिलेश को 29 फरवरी यानी गुरुवार को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।

अखिलेश

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश इस मामले में बतौर गवाह पेश होंगे। हालांकि, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि मीडिया से जानकारी मिली है कि CBI ने अखिलेश यादव को नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक ऑफिशियल रूप से नोटिस नहीं मिली है। बता दें कि साल 2012-13 में सीएम रहते खनन विभाग अखिलेश यादव के पास था, उस समय अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

क्या है पूरा मामला

दरअसल सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हमीरपुर में 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन का मामला सामने आया था। योगी सरकार बनने पर इस मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग एक्ट समेत कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला समेत सभी 11 लोगों को नामजद किया गया था। सीबीआई ने आईएएस अफसर बी. चंद्रकला के घर भी छापा मारा था। इस मामले में आईएएस बी. चंद्रकला और सपा एमएलसी रहे रमेश चंद्र मिश्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

IAS बी चंद्रकला पर भी लगे थे आरोप

साल 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो उसमें पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम सामने आया। इतना ही नहीं अखिलेश यादव सरकार में कई जिलों की डीएम रहीं बी. चंद्रकला पर भी आरोप लगे और उनके यहां भी छापेमारी हुई। वहीं पिछले काफी समय से अखिलेश यादव सीबीआई और ईडी को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे हैं। वे लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव के वक्त सरकार सीबीआई और ईडी को राजनेताओं पीछे लगा देती है। ऐसे में अब सीबीआई के समन पर भी यूपी की सियासत गरमाने वाली है। माना जा रहा है कि सीबीआई अखिलेश यादव को गिरफ्तार भी कर सकती है।

 

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