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देश

मल्लिकार्जुन खड़गे ने रावण से कर डाली पीएम मोदी की तुलना‚ भड़की BJP

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Mallikarjun Kharge

अहमदाबाद: गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Elections 2022) के बीच बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है. मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi ) पर एक विवादास्पद बयान देकर बवाल खड़ा कर दिया है.
मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम की तुलना रावण से कर दी है। जिसके बाद बीजेपी भड़क उठी है।  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके बयान की आलोचना की है।
क्या है मामला
दरअसल गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्हाेने कहा कि पीएम मोदी के चेहरे हर चुनाव में दिख जाते हैं, क्या उनके रावण की तरह 100 सिर हैं?’  उन्हाेने यह भी कहा कि “मोदी जी प्रधान मंत्री हैं। अपने काम को भूलकर, वे निगम चुनाव, विधायक चुनाव, एमपी चुनाव, हर जगह प्रचार करते रहते हैं। वहीं बीजेपी ने खड़गे के इस बयान की कड़ी निंदा की है।
खड़के ने कहा, “मैं देख रहा हूं कि मोदीजी के नाम पर वोट मांगा जाता है, चाहे वह नगर पालिका चुनाव हो, निगम चुनाव या राज्य चुनाव…उम्मीदवार के नाम पर वोट मांगे जाते हैं। क्या मोदी नगरपालिका में आकर काम करने जा रहे हैं?” क्या वह आपकी जरूरत के समय आपकी मदद करने जा रहे हैं,” मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूछा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैंने गुजरात का विकास’ के नए नारे का मजाक उड़ाते हुए खड़गे ने कहा, ‘कांग्रेस के पूर्व नेताओं ने गुजरात के विकास में योगदान दिया, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने गुजरात के विकास में योगदान दिया, कोई कैसे भूल सकता है इसके अलावा, गुजरात के लोगों ने गुजरात के विकास में योगदान दिया है।”

बीजेपी ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर साधा निशाना

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने पीएम मोदी की तुलना ‘रावण’ से करने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साधा. संबित पात्रा ने मंगलवार को दावा किया कि ऐसी भाषा “गुजरात के बेटे” के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “यह निंदनीय है और कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। यह सिर्फ पीएम मोदी का ही नहीं, बल्कि हर गुजराती का, गुजरात का अपमान है।”
पात्रा ने आगे कांग्रेस पार्टी पर देश को बांटने का आरोप लगाया और कहा कि ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ देश को बांट रहा है और पीएम मोदी को गाली दी है.
उन्होंने कहा, ‘सभी गुजरातियों से अपील है कि जिस पार्टी के अध्यक्ष ने मोदी का अपमान किया है, उसे सबक सिखाया जाना चाहिए। गुजरातियों को लोकतांत्रिक तरीके से अपने घरों से बाहर आना चाहिए और कांग्रेस के खिलाफ मतदान कर बदला लेना चाहिए।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो साझा किया और “गुजरात और उसके बेटे” का अपमान करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, ”गुजरात चुनाव की आंच झेल पाने में अक्षम, हाशिये पर धकेले गए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अपनी बातों पर नियंत्रण नहीं रहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘रावण’ कहते हैं. ‘मौत का सौदागर’ से ‘रावण’ तक कांग्रेस गुजरात और उसके बेटे का अपमान करना जारी है…”
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने 80 से ज्यादा बार पीएम और गरीब समाज को अपशब्द कहे हैं।

Politics

झंडे बनाने के बाद अब गेहूं काटते हुए नजर आए योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर

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गेहूं की कटाई करते हुए ओमप्रकाश राजभर

चुनाव आते ही वोटरों को लुभाने के लिए नेता ऐसे-ऐसे काम करने लग जाते हैं जो आपने सपने में भी नही सोचा होगा। इस क्रम में नेता वे सारे काम करते दिख रहे हैं जो शायद ही कभी किए हों। अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर खेत में कटाई करते दिख रहे हैं। इस वीडियो में अपने कार्यकर्ताओं और मीडिया के कैमरे के फोकस के हिसाब से राजभर गेहूं काट रहे हैं। साथ ही ओम प्रकाश ये भी कहते दिख रहे हैं कि ये सब करके छोड़ दिया है।

फुर्ती से गेहूं काटते दिख रहे राजभर

जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश के घोसी लोकसभा क्षेत्र में ग्राम सभा मुहम्मदपुर के बरहिया ब्लॉक रतनपुरा जनपद मऊ में प्रचार के दौरान ओम प्रकाश राजभर अचानक अपना काफिला रोककर एक खेत खलिहान में पहुंच गए। इसके बाद  कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हंसिया लेकर गेहूं काटने लगे। हालांकि गौरकरने वाली बात ये है कि राजभर इस वीडियो में अच्छी-खासी फुर्ती से गेहूं काटते दिख रहे हैं और साथ ही ये भी कह रहे हैं कि ये सब काम करके छोड़ दिया है।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले ओमप्रकाश राजभर का एक और वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो अपनी पार्टी झंडे खुद बनाते हुए नजर आ रहे थे। उनके उस वीडियो पर भी लोगों ने खूब कमेंट किये थे।

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देश

असम में 88 साल पुराने मुस्लिम विवाह अधिनियम को सरकार ने किया रद्द

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असम।  भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार की हेमंत बिस्वा सरमा मुस्लिम विवाह अधिनियम और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को रद्द कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस कानून के दायरे में मुस्लिमों की लगभग एक तिहाई आबादी (35%) थी। बीते शुक्रवार को कैबिनेट मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि उन्होंने 88 साल पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को रद्द कर दिया है।

हेमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा ने बैठक के बाद सोशल मीडिया साइट एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि असम कैबिनेट ने सदियों पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम को निरस्त करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इस अधिनियम में विवाह पंजीकरण की अनुमति देने वाले प्रावधान शामिल थे, भले ही दूल्हा और दुल्हन 18 और 21 वर्ष की कानूनी उम्र तक नहीं पहुंचे हों, जैसा कि कानून द्वारा आवश्यक है। यह कदम असम में बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

असम के कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने एक प्रेस वार्ता में असम मुस्लिम विवाह और तलाक अधिनियम 1935 को निरस्त करने और यूसीसी को मंजूरी देने के बारे में बात की। बरुआ ने इसे “बहुत महत्वपूर्ण निर्णय” बताया और कहा, “माननीय मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि हम समान नागरिक संहिता की ओर जा रहे हैं, इसलिए आज एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, वह है असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम , 1935, निरस्त कर दिया जाएगा और कोई भी मुस्लिम विवाह या तलाक अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आगे इस अधिनियम की आलोचना करते हुए दावा किया कि यह बाल विवाह को अनुमति देता है, और तर्क दिया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का लंबे समय से बाल विवाह को खत्म करने का लक्ष्य था, उन्होंने कहा, “यह पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष की स्वीकार्य आयु से पहले विवाह को पंजीकृत करने की गुंजाइश प्रदान करता है।”

 

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उत्तरप्रदेश

केजरीवाल के बाद अब अखिलेश को घेरने में जुटी BJP‚ दस साल पुराने में मामले CBI ने भेजा समन

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी एक-एक करके सभी विपक्षी दलों पर कानूनी शिकंजा कसती जा रही है‚ ताकि चुनाव में कोई उसे टक्कर न दे सके। कांग्रेस‚ टीएमसी‚ झामुमो और आम आदमी पार्टी के बाद अब निशाने पर यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को उन्हे अवैध खनन मामले में समन भेजा है। CBI ने अखिलेश को 29 फरवरी यानी गुरुवार को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।

अखिलेश

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश इस मामले में बतौर गवाह पेश होंगे। हालांकि, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि मीडिया से जानकारी मिली है कि CBI ने अखिलेश यादव को नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक ऑफिशियल रूप से नोटिस नहीं मिली है। बता दें कि साल 2012-13 में सीएम रहते खनन विभाग अखिलेश यादव के पास था, उस समय अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

क्या है पूरा मामला

दरअसल सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हमीरपुर में 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन का मामला सामने आया था। योगी सरकार बनने पर इस मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग एक्ट समेत कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला समेत सभी 11 लोगों को नामजद किया गया था। सीबीआई ने आईएएस अफसर बी. चंद्रकला के घर भी छापा मारा था। इस मामले में आईएएस बी. चंद्रकला और सपा एमएलसी रहे रमेश चंद्र मिश्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

IAS बी चंद्रकला पर भी लगे थे आरोप

साल 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो उसमें पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम सामने आया। इतना ही नहीं अखिलेश यादव सरकार में कई जिलों की डीएम रहीं बी. चंद्रकला पर भी आरोप लगे और उनके यहां भी छापेमारी हुई। वहीं पिछले काफी समय से अखिलेश यादव सीबीआई और ईडी को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे हैं। वे लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव के वक्त सरकार सीबीआई और ईडी को राजनेताओं पीछे लगा देती है। ऐसे में अब सीबीआई के समन पर भी यूपी की सियासत गरमाने वाली है। माना जा रहा है कि सीबीआई अखिलेश यादव को गिरफ्तार भी कर सकती है।

 

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