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75 साल से ऐतिहासिक तिरंगा संभालकर रखे हुए है मेरठ का ये परिवार‚ कांग्रेस अधिवेशन में नेहरू ने किया था ध्वजारोहण

इस ऐतिहासिक तिरंगे को अमूल्य धरोहर की तरह संभालना देश के प्रति अथाह प्रेम को जताता है। साथ ही इस बात का सच्चा उधाहरण है कि गुरू नागर और पूर्वजों ने किस प्रकार देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया।

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Independence Day special: इस बार हमारा देश स्वतंत्रता दिवस की 75 वर्षगांठ मनाने जा रहा है। जब स्वतंत्रता की बात आती है तो याद आता है कि देश की स्वतंत्रा के लिए कितने वीर जवानों ने अपने प्राण न्यौछावर किए। अन-गिनित शहीदों ने देश के लिए हंसते-हंसते अपनी जान दे दी। आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी देश के लोगों के दिलों में देश प्रेम की भावना कम नही हुई है। कुछ देश प्रेमी ऐसे भी हुए हैं जिनकी आज की पीढ़ी भी उसी निष्ठा और ईमानदारी से देश के प्रति कार्य कर रही है।

75 साल पुराना ऐतिहासिक तिरंगा दिखाते हुए गुरू नागर

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर की। जहां के रहने वाले गुरु नागर ने 75 वर्ष पुराना ऐतिहासिक तिरंगा आज भी संभालकर रखा हुआ है। यह तिरंगा देश की आजादी से पहले विक्टोरिया पार्क में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन के दौरान फहराया गया था। इसकी लंबाई 14 फीट और चौड़ाई 9 फीट है। गुरुनागर की तीन पीढ़िया इस अमूल्य धरोहर को अब तक संभाले हुए हैं।

प्रधानमंत्री नेहरू ने दिया था तिरंग

इस ऐतिहासिक तिरंगे को अमूल्य धरोहर की तरह संभालना देश के प्रति अथाह प्रेम को जताता है। साथ ही इस बात का सच्चा उधाहरण है कि गुरू नागर और पूर्वजों ने किस प्रकार देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया। गुरु नागर बताते हैं कि अधिवेशन समाप्त होने के बाद नेहरू जी ने यादगार के तौर पर यह तिरंगा उनके दादा गणपत राम नागर को हिफाजत से रखने के लिए दिया था। तब से लेकर अब तक गणपत राम नागर की तीसरी पीढ़ी इस ऐतिहासिक तिरंगे की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।

आज भी गुरु नागर का पूरा परिवार इस ऐतिहासिक तिरंगे की बहुत ही अदब व मान सम्मान के साथ देखभाल करता है। गुरु नागर ने बताया कि अपने मरने से पहले वो इस इतिहासिक झंडे की जिम्मेदारी वे अपने पुत्र विक्रांत नागर को देकर जाएंगे। ये जिम्मेदारी उनके पिता सूरज नागर ने उन्हे दी थी जो आर्मी में थे। गुरु नागर का कहना है कि यह उनकी इच्छा है कि इस ऐतिहासिक झंडे की देखभाल उनके परिवार के पास ही रहे।

गणपत राम नागर और विकटोरिया पार्क जाते तत्तकालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू

आपको बता दें गुरु नागर के दादा गणपत राम नागर आजाद हिंद फौज द्वितीय विश्व युद्ध में डिवीजन के कमांडर रहे थे। गणपत राम नगर का जन्म पंडित विष्णु नागर के घर 16 अगस्त 1905 को मेरठ में हुआ था। मेरठ में शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1928 में ब्रिटिश आर्मी में किंग अफसर के पद पर नियुक्त हुए।

तिरंगे के बारे में जानकारी देते हुए गुरू नागर और उनकी पत्नी

बाद में उन्होंने आजाद हिंद फौज में मेजर जनरल के पद पर कार्यरत हुए। उन्हे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नजदीकी होने और देश की आजादी के प्रति कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ऐसे देश भक्तों को आँखों देखी Live भी सलूट करता है जो इतने लंबे अरसे से देश की धरोहर को संजोकर रखे हुए हैं।

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