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oxygen और Medicines की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की केन्द्र को फटकार‚ मांगा जवाब

Coronavirus In India- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मोदी सरकार को नोटिस जारी किया है। जिसके माध्यम से पूछा है कि आपके पास कोविड-19 से निपटने के लिए क्या राष्ट्रीय प्लान है। कोर्ट ने इस मामले में हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया है।

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Coronavirus In India: कोरोना के बढ़ते ग्राफ और oxygen की कमी से लगातार हो रही मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट [Supreme Court] ने केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मोदी सरकार [ Modi government] को नोटिस जारी किया है। जिसके माध्यम से पूछा है कि आपके पास कोविड-19 से निपटने के लिए क्या राष्ट्रीय प्लान है। कोर्ट ने इस मामले में हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने 4 मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा है। जिसमें पहला ऑक्सीजन की सप्लाई [Oxygen supply]‚ दूसरा दवाओं की कमी [ Drug shortage]‚ तीसरा वैक्सीन का देने का तरीका और चौथा लॉकडाउन करने का अधिकार सिर्फ राज्यों को है या कोर्ट को नहीं पर जवाब मांगा है। सरकार को कल तक इन चारों सवालों के जवाब देने है। अब इस पूरे मामले की सुनवाई कल होगी।

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आपको बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि आप गिड़गिड़ाएं या उधर लाइए या फिर चोरी कीजिए। कहीं से भी ऑक्सीजन लेकर आइए क्योंकि हम मरीजों को मरता हुआ नहीं देख सकते हैं। बुधवार को दिल्ली के कुछ अस्पतालों में ऑक्सीजन की तत्काल जरूरत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कड़ी टिप्पणी केंद्र सरकार पर की थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर रहे दिल्ली के अस्पतालों को कहीं से भी ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा था कि केंद्र कोर्ट के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। केंद्र ने नासिक में हुई मौतों का भी जिक्र किया। कोर्ट कहा कि उद्योग जगत ऑक्सीजन की आपूर्ति के कई दिनों तक इंतजार कर सकता है लेकिन ऑक्सीजन की कमी के चलते बेड पर मरने वाला व्यक्ति पल भर भी ऑक्सीजन का इंतजार नहीं कर सकता है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि अगर टाटा स्टील अपने ऑक्सीजन कोटे को डायवर्ट कर सकती है तो अन्य उद्योग ऐसा क्यों नहीं कर सकते। क्या इंसानियत बिल्कुल भी नहीं बची है। अदालत ने दिल्ली के मैक्स अस्पताल की अर्जी पर भी सुनवाई की जिसमें 14 मरीजों को बचाने के लिए अदालत का रुख किया था। अस्पताल ने दावा किया था कि उसके पास पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं है। इस पर अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा था कि उनके आदेश पर अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं दी जा रही है।

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