गैर BJP राज्यों में काम नही करने दे रही हैं मोदी सरकार: चंद्रशेखर राव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र के अध्यादेश का विरोध किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केसीआर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गैर-बीजेपी सरकारों को काम नहीं करने दे रही है।

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तेलंगाना के सीएम और केजरीवाल

नई दिल्ली: सीएम केजरीवाल दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे पर समर्थन जुटाने में जुटे हुए हैं. केजरीवाल शनिवार को हैदराबाद पहुंचे और तेलंगाना के सीएम केसीआर से मुलाकात की। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र के अध्यादेश का विरोध किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केसीआर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गैर-बीजेपी सरकारों को काम नहीं करने दे रही है।

केसीआर का केजरीवाल को समर्थन
केसीआर ने कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में काफी लोकप्रिय पार्टी है। आम आदमी पार्टी ने स्थानीय चुनावों में जीत हासिल की। उन्होंने (भाजपा) अड़ंगा डाला और आखिरकार दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। 8 साल बाद दिल्ली की जनता को न्याय मिला। इस नोटिफिकेशन को रद्द करने में हमें 8 साल लग गए लेकिन 8 दिन के अंदर ही सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिकारियों को दिल्ली सरकार के तहत काम करना चाहिए न कि राज्यपाल के हाथों में। अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान नहीं किया जाता है तो हम उन दिनों को याद करते हैं जब आपातकाल लगाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अध्यादेश वापस लेने का आग्रह करते हुए केसीआर ने कहा कि हम सभी अरविंद केजरीवाल का समर्थन करते हैं।

‘बात सिर्फ दिल्ली की नहीं’
इस बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “यह सिर्फ दिल्ली का मामला नहीं है, यह लोकतंत्र का मामला है।” अगर देश का प्रधानमंत्री यह कहे कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानता है और अध्यादेश लाकर कानून की धज्जियां उड़ाता है, तो न्याय की गुंजाइश कहां होगी? प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर केंद्र के साथ आम आदमी पार्टी सरकार की तकरार के बीच अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सभी विपक्षी दलों के नेताओं से इस मामले पर समर्थन लेने के लिए संपर्क करेंगे ताकि अध्यादेश पारित किया जा सके।