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जानिए आखिर Toyota की गाडियां ही क्यों यूज करते हैं आतंकी‚ टेररिस्ट टैग लगने से कंपनी भी है परेशान

सवाल यह उठता है कि आखिर आतंकी टोयोटा कंपनी की गाडियां ही क्यों प्रयोग करते हैं। फिर चाहे तालिबानी आतंकी हो या आईएसआईएस के आतंकी‚ सबको टोयटा की गाडियां ही पसंद हैं। टीवी और अखबारों में भी आतंकी टोयोटा कंपनी के मिनी ट्रकों पर बड़े-बड़े हथियारों के साथ खड़े हुए नजर आते हैं।

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New delhi: अफगानिस्तान पर तालिबान ने 1996 के बाद एक बार फिर कब्जा कर लिया है। पिछले कुछ दिनों से आप लोग सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों के माध्यम से इस बारे में कई खबरे और तस्वीरें देख रहे होंगे। इन तस्वीरों में आपने देखा होगा कि ज्यादातर आतंकी टोयोटा कंपनी की गाडियों का इस्तेमाल करते हुए नजर आते हैं। यही नही इससे पहले भी कई देशों में आतंकी टोयोटा कंपनी की गाडियों का प्रयोग करते हुए दिखाई दिए हैं।

सवाल यह उठता है कि आखिर आतंकी टोयोटा कंपनी की गाडियां ही क्यों प्रयोग करते हैं। फिर चाहे तालिबानी आतंकी हो या आईएसआईएस के आतंकी‚ सबको टोयटा की गाडियां ही पसंद हैं। टीवी और अखबारों में भी आतंकी टोयोटा कंपनी के मिनी ट्रकों पर बड़े-बड़े हथियारों के साथ खड़े हुए नजर आते हैं। तो चलिए आज हम आपको इसकी वजह बताते हैं कि क्यों आतंकियों को टोयोटा की गाडियां पसंद है।

यह है मुख्य वजह

आपको बता दें कि टोयोटा जापान की मशहूर ऑटोमोबाइल कपंनी है। जो लग्जरी गाडियों के साथ-साथ इन पिकअप ट्रकों का निर्माण भी करती है। यह मिनी ट्रक मजबूती के हिसाब से काफी अहम माने जाते हैं। आतंकी ज्यादातर उबड़-खाबड़ और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। ये मिनी ट्रक इन इलाकों में आसानी से हथियार और जरूरत का सामान पहुंचाने में सक्षम हैं। अफगानिस्तान में भी देहात का सारा इलाका उबड़-खाबड़ और पहाड़ी है। इसलिए आतंकियों को ये ट्रक पसंद हैं।

तालिबान ने 1996 में भी किया था टोयोटा गाडियों का प्रयोग

अफगानिस्तान में तालिबान में दोबारा से सत्ता हासिल की है। इसमें अहम रोल टोयोटा के इन मिनी ट्रकों का भी है। क्योंकि ये ट्रक छोटी और उबड़-खाबड़ जगह पर आसानी निकल जाते हैं। जबकि सेना के वाहन इन इलाकों में घुस नही पाते। कई बार और मजबूती के लिए आतंकी इन ट्रकों को इंजन बदल कर भी इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि तालिबान ने जब 1996 में अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तब भी उसके पास टोयोटा कंपनी के यह मिनी ट्रक मौजूद थे और अब 20 साल बाद भी उसने इन्हें ट्रकों के बलबूते पर दोबारा से अफगानिस्तान में सत्ता हासिल की है।

आतंकी टैग लगने से कंपनी परेशान

ऐसा नहीं है कि जापान की टोयोटा कंपनी आतंकियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अपनी गाड़ियों से खुश है। दरअसल कंपनी भी आतंकियों के पास पहुंचे इन ट्रकों को लेकर खासी परेशान हैं। कंपनी ने कभी भी आतंकियों को इन्हे बेचा नही है। लेकिन तालिबान और आतंकियो का प्रतीक बन चुके इन ट्रकों से कंपनी की छवि इतनी ज्यादा खराब हुई कि टोयोटा ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। जांच में कंपनी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आतंकियों के पास ये गाडियां कैसे पहुंच जाती हैं।

इस तरह से पहुंचते हैं आतंकियों के पास ट्रक

कुछ मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक बहुत से विकासशील देशों में मानव अधिकार संस्थाएं काम कर रही हैं। मानव अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के बीच टोयटा के ऐसे मॉडल खासे लोकप्रिय है। यह गाडियां किसी भी जमीन और पहाड़ों पर आसानी से चल सकती हैं। कंपनी के मुताबिक पिछले 40 साल में वो रेडक्रॉस और संयुक्त राष्ट्र को करीब डेढ़ लाख गाड़ियों की सप्लाई कर चुकी हैं। कंपनी का मानना है कि इन्ही देशों से टोयटा के पिकअप ट्रकों को चोरी कर आतंकी संगठनों तक पहुंचाया जाता है। अब कंपनी ने कहा है कि अब अगर कोई शख्स टोयटा की गाड़ियां किसी आतंकी संगठन को बेचेगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।

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