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जानिए क्या होता है sC/sT एक्ट‚ कब लगता है और कितने साल की होती है सजा ?

What is SC/ST Act: आजादी के बाद से देश ने बहुत तरक्की की है। लेकिन फिर भी कुछ जाति और समाज अपने अधिकारों से वंचित रहे। यूं तो भारतीय संविधान में विशेष वर्ग जैसे अति पिछड़ा, दलित आदि को समानता का मौलिक अधिकार मिला लेकिन फिर भी ये लोग भेदभाव का शिकार होते रहे। जिससे बचाने के लिए सरकार ने इन लोगों को एक विशेष अधिकारी दिया है। इसे हम SC/ST एक्ट के नाम से जानते हैं। [Complete information about SC/ST Act in Hindi]

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What is SC/ST Act: आजादी के बाद से देश ने बहुत तरक्की की है। लेकिन फिर भी कुछ जाति और समाज अपने अधिकारों से वंचित रहे। यूं तो भारतीय संविधान में विशेष वर्ग जैसे अति पिछड़ा, दलित आदि को समानता का मौलिक अधिकार मिला लेकिन फिर भी ये लोग भेदभाव का शिकार होते रहे। जिससे बचाने के लिए सरकार ने इन लोगों को एक विशेष अधिकारी दिया है। इसे हम SC/ST एक्ट के नाम से जानते हैं। [Complete information about SC/ST Act in Hindi]

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आज हम आपको इसी SC/ST ACT यानी अनुसूचित जाति (Schedule Caste) और अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe) या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के विषय में जानकारी देंगे। यहां हम आपको ये बताएंगे कि इस एक्ट को कब और क्यों लाया गया था। इस कानून से पीड़ित को कैसे सहायता और सुरक्षा मिलती है और आरोपी को कितनी सजा हो सकती है।

ताे चलिए शुरू करते हैं…

यह कानून 11 दिसंबर 1989 को पारित हुआ था। इसको 30 जनवरी 1990 में जम्मू कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे देश में लागू किया गया था। यह एक्ट हर उस व्यक्ति पर लागू होता है जो अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति वर्ग का नहीं है। इस एक्ट से इन वर्गों के लोगों पर हो रहे अत्याचार और अपराध करने वालों को सजा देने का प्रावधान है।

5 साल से मौत की सजा तक

SC/ST ACT में इन वर्ग के लोगों पर अत्याचार करने वालों पर मुकदमा दर्ज सजा देने का प्रावधान है। इस एक्ट में अपराधी को 6 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। यदि कोई इस वर्ग के लोगों पर क्रूर अत्याचार व जघन्य अपराध कर हत्या कर देते है तो अपराधी को मौत की सजा भी दी जा सकती है।

अलग कोर्ट में होती है सुनवाई

इस एक्ट में 5 चैप्टर 23 सेक्शन है। इस कानून के तहत एक अलग कोर्ट बनाई जाती है। जिसमें ऐसे मामलों पर तुरंत सुनवाई होकर अपराधी को सजा देने का प्रावधान है। इस वर्ग के लोगों के आत्म सम्मान व उनके हितों के लिए इस अधिनियम को पारित किया गया था।

कब लगता है SC/ST एक्ट

एससी/ एसटी एक्ट में कौन-कौन से अपराध पर शामिल है और उन पर कितनी सजा का प्रावधान है अब आपको ये बताते हैं। दरअसल एससी/एसटी एक्ट के अन्तर्गत कुल 20 अपराध शामिल हैं। मतलब यह है कि इन 20 वजहाें से आरोपी पर एससी/एसटी एक्ट लगाया जा सकता है।

ये हैं वो 20 कारण


एससी/ एसटी के लोगों को जाति-सूचक शब्द कहकर अपमानित करना‚ मल-मूत्र खिलाना, सामाजिक बहिष्कार करना‚ उनके साथ व्यापार ना करना‚ इस वर्ग के लोगों को काम ना देना या फिर नौकरी पर ना रखना‚ शारीरिक चोट पहुंचाना‚ उनके घर के बाहर कूड़ा करकट डालना‚ उनके घर के बाहर मरे हुए पशुओं का शव डालना, जबरदस्ती कपड़े उतरवाना या नंगा करके घुमाना‚ मुंह पर कालिख पोतकर घुमाना

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गैर कानूनी रूप से उनकी खेती की जमीन पर कब्जा करना, उनकी फसल को काटना, भीख मांगने पर मजबूर करना‚ बंधुआ मजदूर रखने पर मजबूर करना, वोट देने से रोकना‚ किसी खास उम्मीदवार को वोट देने के लिए जबरदस्ती मजबूर करना‚ इस वर्ग की महिला के लिए जबरदस्ती शारीरिक शोषण करना, पीने के पानी को कुएं आदि को गंदा करना या सार्वजनिक स्थान पर जाने से रोकना। इस सभी वजहों से आरोपी के खिलाफ एससी/ एसटी लगाया जा सकता है।

CO स्तर का अधिकारी करता है जांच

एससी/एसटी कानून के मामलों की जाँच कम से कम डिप्टी एसपी या CO रैंक का अधिकारी की कर सकता है। यदि किसी आम आदमी पर एससीएसटी कानून के अंतर्गत केस दर्ज होता है, और जांच में अपराध सही पाया जाता है तो उसकी गिरफ्तारी तुरंत की जाती है।

जांच अधिकारी को भी हो सकती है सजा

इस एक्ट में यदि कोई जांच अधिकारी जो इस वर्ग का नहीं है। यदि वह इस एक्ट का पालन नहीं करता है या आरोपी को लाभ पहुंचाता है तो उसे भी 6 से महीने से लेकर 1 साल की सजा का भी प्रावधान है। इसके अलावा मुकदमा दर्ज कराते वक्त थाने में पीड़ित को लिखित शिकायत को पढ़कर सुनाना पड़ता है। तथा उसकी एक छायाप्रतिलिपि पीड़ित को देनी होती है। FIR होने के 60 दिन के अंदर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल भी करनी पड़ती है।

एससी/एसटी एक्ट सहायता राशि

अनुसूचित जाति/जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989  के अनुसार  उत्पीड़ित अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न की घटनाओं में आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है। यह राशि एफ० आई० आर० (FIR) दर्ज होने के बाद विभाग द्वारा प्रथम चरण में पीड़ित को दी जाती है, अगर जांच में अपराध सही पाया जाता है तो उत्पीडित व्यक्ति को रू. 40000/- से रू. 500000/- तक आर्थिक सहायता दी जाती है।

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एससी/एसटी एक्ट में आरोपी को जमानत

यूं तो एससी/एसटी एक्ट में जमानत मिलना कठिन होता है। लेकिन अगर शिकायतकर्ता यदि प्रथम दृष्टया केस साबित नहीं कर पाता है तो आरोपियों को अग्रिम जमानत प्राप्त करने की अर्जी देने का अधिकार है। इसमें धारा-18 व 18-ए इसमें बाधक नहीं होगी।

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