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दैनिक भास्कर के ठिकानों पर आयकर विभाग की छोपेमारी‚ अखबार ने बताया सरकार की साजिश

केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड की तरफ से इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई एजेंसी के प्रोसेस का हिस्सा हैं। वहीं दैनिक भास्कर पर आयकर विभाग के छापे के विरोध में संसद में भी हंगामा हुआ है।

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New Delhi: टैक्स चोरी के मामले में आयकर विभाग ने बुधवार को मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के कई अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। आयकर विभाग की टीम ने भोपाल‚ जयपुर और अहमदाबाद समेत देश के कई बड़े शहरों में दैनिक भास्कर के ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की है। आयकर टीम ने भास्कर में काम करने वाले कई लोगों के घरों पर भी छापेमारी की है। दफ्तरों में मौजूद लोगों के मोबाइल जब्त किए गए हैं। छापेमारी में अखबार के प्रमोटर का भोपाल वाला घर भी शामिल है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड की तरफ से इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि ये कार्रवाई एजेंसी के प्रोसेस का हिस्सा हैं। वहीं दैनिक भास्कर पर आयकर विभाग के छापे के विरोध में संसद में भी हंगामा हुआ है। इसके लिए कुछ समय के लिए मानसून सत्र की कार्यवाही को भी ठप करना पड़ा है। खुद अखबार ने इसे सरकार की साजिश बताया है।

कांग्रेस ने कहा लाेकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश

दैनिक भास्कर के ठिकानों पर की गई कार्रवाई पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है। कई कांग्रेस नेताओंं ने इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिगविजय सिंह छापेमारी को लेकर कई ट्वीट किए हैं। वही केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस मामले पर जवाब देते हुए कहा है ये एजेंसी अपना काम करती है इसमें सरकार की कोई दखलअंदाजी नही है।

विदेशी मीडिया में आलोचना

दैनिक भास्कर ग्रुप पर की गई छापेमारी को लेकर विदेशी मीडिया में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेड लाइन में लिखा है कि जरूरी कवरेज करने से कुछ महीनों के भीतर ही दैनिक भास्कर पर इनकम टैक्स का छापा पड़ गया है। अमेरिकी अखबार ने यह भी लिखा है कि भारत के सबसे प्रमुख अखबार पर छापेमारी की वजह कोरोना काल के दौरान की गई जरूरी कवरेज रही है।

पत्रकारों को काम करने से रोकने कोशिश

इस कार्रवाई पर दैनिक भास्कर ग्रुप ने कहा है कि सरकार की छापेमारी पत्रकारों को काम करने से रोकने की कोशिश है। भास्कर अखबार का कहना है कि देश में दूसरी लहर के दौरान 6 महीने तक हमने कोरोना प्रभावित प्रमुख राज्यों के असली हालात को देश के सामने रखा है। हमने गंगा में लाशें बहाए जाने का मामला देश के सामने लाया है। कोरोना से होने वाली मौतों को छिपाने का खेल, हमने उजागर किया है। हमने निडर पत्रकारिता दिखाई और जनता के सामने सच को रखा है। सरकार पत्रकारों को काम करने से रोकने की कोशिश कर रही है।

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