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India में पीरियड्स के दौरान इन मुश्किलों का सामना करती हैं महिलाएं

मनोज कुमार

दुनिया की सभी महिलाओं को एक निश्चित उम्र अवधि के दौरान मासिक धर्म जरूर होता है। जिनमें महिलाओं को हर माह 3 से 7 दिनों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं को तो इस अवधि के दौरान असहनीय दर्द का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए इन दिनों को मुश्किल भरे दिनों की संज्ञा भी दी गई है।

महिलाओं के शरीर में हार्मोन में होने वाले बदलाव की वजह से गर्भाशय से स्क्त और अंदरूनी हिस्से से होने वाली स्त्राव को मासिक धर्म कहते हैं। मासिक धर्म को माहवारी, रजोधर्म, मेंस्ट्रुअल साइकिल या एमसी और पीरियड्स के नाम से भी जाना जाता है।

किस उम्र में होता है मासिक धर्म

मासिक धर्म सबको एक ही उम्र में नहीं होता। लड़कियों को सामान्य तौर पर 11 से 13 वर्ष की उम्र में मासिक धर्म शुरू हो जाता है। यह कई बातों पर निर्भर करता है। लड़की के जीन्स की रचना, खान-पान, काम करने का तरीका, वह जिस जगह पर रहती है, उस स्थान की ऊंचाई कितनी है आदि। पीरियड्स या मासिक धर्म महीने में एक बार आता है। लड़कियों या महिलाओं को माहवारी 3 से 5 या 7 दिनों तक रहती है।

फोटो साभार-सोशल मीडिया

माहवारी महिलाओं के शरीर में होने वाली एक सामान्य वैज्ञानिक क्रिया है। किशोर अवस्था से शुरू होकर अमूमन अधेड़ावस्था तक यह मासिक प्रक्रिया चलती है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो पीरियड गर्भाशय की आंतरिक सतह एंडोमेट्रियम के टूटने से होने वाला रक्त स्राव है। गर्भधारण और शरीर में हार्मोन नियंत्रण के लिए इस प्रक्रिया का सामान्य होना आवश्यक है।

इन मुश्किलों का भी सामना करती हैं महिलाएं

कई धर्मो में मासिक धर्म के दौरान महिलाओ को अछूत समझा जाता है। हिंदुस्तान में लड़कियों को अगर पीरियड्स हो तो उन्हें अपवित्र मानकर किचन में एंट्री नहीं मिलती। मंदिर में नहीं जाने दिया जाता। कुछ-कुछ घरों में तो उन्हें बिस्तर में सोने भी नहीं दिया जाता और उन्हें अशुद्ध माना जाता है।
आपको बताते है कि औरतों के पीरियड्स काल को अलग-अलग धर्म किस नजरिए से देखते हैं।

(1) हिंदू धर्म…

हिंदू धर्म में महिलाएं पीरियड्स होने के दौरान त्यौहार या दूसरे शुभ कार्यों में शामिल नहीं हो सकती है। माहवारी के दौरान उन्हें धार्मिक कार्यों में शामिल नहीं होने दिया जाता। उन्हें पूजा स्थल या किचन के नज़दीक भी नहीं जाने दिया जाता।

फोटो साभार-सोशल मीडिया

दरअसल हिन्दू धर्म मे मासिक धर्म के बारे में एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार भगवान इंद्र ने विश्वरूपाचार्य का सिर धड़ से अलग कर दिया था। जिस कारण गुरू ब्रहस्पती इंद्र लोक छोड़कर चले गए और इंद्र कमजोर हो गए। इस समय असुरों ने इंद्रलोक पर हमला कर दिया। इंद्र कई वर्षों तक एक फूल में छुपे रहे और भगवान विष्णु की अराधना करते रहे। ऐसे में विष्णु ने कहा कि इंद्र अपना पाप दूसरों में बांट दें। वो पाप पेड़, पानी, जमीन और औरत में बटा। इसी कारण औरतों को मासिक धर्म होने लगा। क्योंकि औरतों पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा था इसलिए मासिक धर्म के दौरान औरतें मंदिरों में नहीं जा सकतीं।

(2) इस्लाम…

फोटो साभार-सोशल मीडिया

इस्लाम में महिलाओं का पीरियड्स के समय कुरान को छूना, मस्जिद में जाना और सेक्स करना वर्जित है। कुरान में 2:222 के अनुसार अगर कोई मासिक धर्म के बारे में पूछे तो कहिए ये अपवित्रता है। इस दौरान महिलाओं से दूर रहिए और उनके पास तभी जाइए जब वो पूरी तरह से पवित्र हो चुकी हों।

(3) यहूदी धर्म

फोटो साभार-सोशल मीडिया

यहूदियों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूरे दो हफ्ते के लिए ये सब झेलना पड़ता है महिलाओ द्वारा पहने गए कपड़े, इस्तेमाल की गई चादर आदि सब को धोना होता है। पूरे घर की सफाई करनी होती है और किसी का भी उन्हें छूना वर्जित होता है।

(4) इसाई…

फोटो साभार-सोशल मीडिया

इसाई लोगों के लिए मासिक धर्म के कार्यकाल में महिलाएं अपवित्र नहीं होती हैं। इस धर्म में औरतों को लेकर सबसे कम पाबंदी लागू है। हालांकि, बाइबल (ओल्ड टेस्टामेंट) में कुछ जगहों पर इसे अपवित्र कहा गया है। लेकिन कहीं भी महिलाओं को दूर करने की बात नहीं कही गई है। इस धर्म में पूर्वी कट्टर चर्च जहां महिलाओं के लिए किसी भी तरह का समागम करना गलत माना गया है। इसके अलावा, रोमन चर्च महिलाओं के लिए थोड़ा कट्टर था जहां पीरियड्स के दौरान महिलाओं पर कुछ पाबंदी लागू है।

(5) बौद्ध धर्म…

फोटो साभार-सोशल मीडिया

बौद्ध धर्म में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के अपवित्र होने की बात नहीं कही गई है। लेकिन इस धर्म में भी महिलाओ के मंदिरों में जाना मना है। कुछ बौद्ध मान्यताओ के अनुसार इस दौरान महिलाएं अपनी जिंदगी की कुछ शक्ति खो देती है। इस दौरान खून पीने वाले भूत (पिशाच) उसके पीछे लग सकते हैं और वो आत्माओं के खतरे में रहती है।

  1. सिख धर्म…
फोटो साभार-सोशल मीडिया

सभी धर्मों में से सिर्फ सिख धर्म ही ऐसा है जो महिलाओं को पीरियड्स के समय पवित्र मानता है। सिख धर्म के रचियता गुरू नानक के अनुसार एक मां का खून जीवन देने के लिए बहुत जरूरी होता है और इसलिए ये पवित्र है। वाहे गुरूजी ने कहा है कि जिंदगी देने के लिए जो बहुत जरूरी होता है, वह मां का खून होता है। और यही वजह है कि इस दौरान भी महिलाओं को हर काम करने की अनुमति दी जाती है।महिलाएं इस समय और भी ज्यादा पूजनीय हो जाती हैं।

(7) जापान शिंतो धर्म

फोटो साभार-सोशल मीडिया

जापान के शिंतो धर्म में महिलाओं को सिर्फ पीरियड के समय ही अपवित्र नहीं माना जाता बल्कि उन्हें अपवित्र ही माना जाता है क्योंकि उन्हें पीरियड्स होते हैं। सिर्फ मंदिर और पूजा घर में जाना ही नहीं उनके लिए पवित्र पहाड़ चढ़ना भी गलत माना जाता है।

नेपाली परंपरा

नेपाल के विभिन्न समुदायों में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अपवित्र समझा जाता है और कुछ सुदूर इलाकों में उनको इस अवधि में घर से दूर एक झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इस प्रथा को छौपदी के नाम से जाना जाता है। नेपाल में छौपदी की परंपरा हिंदुत्व से जुड़ी हुई है और इस परंपरा में माहवारी के दौरान और बच्चे पैदा होने के बाद भी महिलाओं को अछूत माना जाता है।

फोटो साभार-सोशल मीडिया

इस दौरान महिलाओं को घर से निकाल दिया जाता है और भोजन छूने, धार्मिक प्रतीकों को छूने और जानवरों और मर्दों से भी दूर रखा जाता है।
हालांकि पिछले दिनों इसी तरह की एक झोपड़ी में सोई एक किशोरी को सांप से डसने से म्रत्यु व दो महिलाओं की जान चली जाने ओर सुदूर रहने के कारण उनके साथ रेप की घटनाएं बढ़ने के कारण देश की शीर्ष अदालत ने इस कुप्रथा पर रोक लगा दी थी। लेकिन देश के कई भागों में यह अब भी प्रचलन में बताई जाती है।

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