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Teej special: जानिए महिलाएं क्यों करती हैं सोलह श्रृंगार‚ क्या है इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Solah shrrngaar – हर साल तीज के मौके पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। वहीं किसी खास मौके पर भी महिलाएं सोलह श्रृंगार करना पसंद करती हैं। खास बात यह है कि जब मृत्यू होती है तब भी अंतिम बार महिलाओं का सोलह श्रृंगार कराया जाता है।

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What is sixteen makeup: हमारा देश एक आध्यात्मिक देश है‚ लेकिन यहां हर कार्य अध्यात्मिक के साथ-साथ विज्ञान से भी जुड़ा है। आज हम बात कर रहे हैं सोलह श्रृंगार की। यह एक स्त्रियों का ऐसा श्रृंगार है जहां सजने-सवरने के लिए धातुओं के साथ प्राकृतिक चीजों का भी उपयोग होता है। सोलह श्रृंगार स्त्रियों का सौभाग्यशाली होने का प्रखंड प्रतीक माना जाता है। पहली बार महिलाएं जब दुल्हन बनती हैं तब सोलह श्रृंगार करती हैं।

फोटो साभार- सोशल मीडिया

हर साल तीज के मौके पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। वहीं किसी खास मौके पर भी महिलाएं सोलह श्रृंगार करना पसंद करती हैं। खास बात यह है कि जब मृत्यू होती है तब भी अंतिम बार महिलाओं का सोलह श्रृंगार कराया जाता है। यह वैदिक शास्त्र और विज्ञान पर पूर्ण आधारित है। तो चलिए आपको बताते हैं क्यों किया जाता है सोलह श्रृंगार और क्या-क्या है इसमें शामिल…

1- पायल: यह चांदी की होती है और यह संपन्नता का प्रतीक माना जाती है। इसकी ध्वनि से नकारात्मक तरंगों का विनाश होता है।

2- बिछुआ: यह भी चांदी का होता है और यह रक्तचाप को सामान्य रखता है।

3- कमरबंद: यह भी चांदी का होता है। इसको नाभि से ऊपर बांधा जाता है‚ इससे शारीरिक संतुलन बना रहता है।

4- अंगूठी: यह सोने और चांदी की दोनों हो सकती है। यह प्रेम के अखंड होने का प्रतीक होती है।

5- चूड़ी- कंगन: सुहागन का सबसे महत्वपूर्ण सिंगार में माना जाता है। यह कांच, लाख, चांदी व सोने की हो सकती हैं। इसको चंद्रमा के समान माना जाता है।

6- बाजूबंद: यह बाजू के पर बांधा जाता है। यह सोना‚ चांदी‚ कुंदन की होता है।

7- मंगलसूत्र: यह सुहागन होने व सौभाग्यवती होने का प्रतीक माना जाता है।

8- करण फूल: यह सोने‚ चांदी‚ कुंदन का होता है। इसको पहनने से सुंदरता बढ़ती है।

9- नथ: हिंदू मान्यता के अनुसार शादी वाले दिन दुल्हन को नथ पहनाया जाता है। बाद में लोंग पहनती हैं। यह स्त्रियों का काफी महत्वपूर्ण सिंगार होता है।

10- मांग टीका: यह एक प्रकार का सोने का जेवर होता है। इसको सिंदूर लगाने वाले स्थान पर पहना जाता है। तथा इसको काफी शुभ माना जाता है। यह यश व सौभाग्य का प्रतीक होता है।

11- गजरा: यह एक प्राकृतिक श्रृंगार है। यह चमेली के फूलों से बनाया जाता है। इसको बालों के बने हुए जुड़े में लगाया जाता हैं। इसकी खुशबू से तनाव से मुक्ति मिलती है।

12- लाल जोड़ा: सोलह श्रृंगार में लाल जोड़े को अत्यंत शुभ माना गया हैA यह प्रेम का प्रतीक माना जाता हैA इसको स्त्रियां शादी वाले दिन पहनती हैं। अधिकतर महिलाएं लाल जोड़े को करवा चौथ या किसी त्योहार में मांगलिक कार्यक्रम में पहनती हैं।

13- मेहंदी: यह एक प्रकार का प्राकृतिक लेप होता है] जिसे महिलाएं हाथों पर अनेक प्रकार के डिजाइन बनाती हैं। मेहंदी का गहरा रंग प्रेम का प्रतीक माना जाता है तथा इसकी खुशबू से तनाव से मुक्ति मिलती है।

14- काजल: यह भी प्राकृतिक सिंगार है। इसे आंखों में लगाया जाता है। इससे चेहरा आकर्षक दिखता है तथा आंखों को ठंडक पहुंचाता है। इसके अलावा यह बुरी नजर से भी बचाता है।

15- सिंदूर: सोलह श्रृंगार में सिंदूर का एक खास स्थान है। यह स्त्री को सुहागन होने का प्रतीक बनता है। स्त्रियां इनको अपनी पति के लंबी उम्र के लिए लगाती हैं।

16- बिंदी: सोलह श्रृंगार में अंतिम स्थान बिंदी का होता है। यह एक विशेष स्थान रखती है। यह खूबसूरती के साथ-साथ चेहरे को आकर्षक बनाती है। शास्त्रों बिंदी को त्रिनेत्र का स्थान दिया गया है।

स्त्रियों के सोलह श्रृंगार में हर सिंगार का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। वह उनका प्रभाव भी अलग-अलग है। स्त्रियों को सुंदरता के साथ साथ अनेकों प्रकार से सौभाग्यशाली प्रतीक बनाता है।

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