Connect with us

उत्तरप्रदेश

Uttar pardesh: मेरठ में थाने के बाहर रात भर किसानों का डेरा

Published

on

मेरठ: में बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के भतीजे की बाइक का चालान काटे जाने के मामले में किसानों का प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है. इस मामले में बुधवार रात किसानों ने गंगानगर थाने पर डेरा डाल दिया और प्रदर्शन किया. किसानों के विरोध को देखते हुए थाना पुलिस ने बाइक से जुर्माना वसूला और जब्त बाइक वापस कर दी.

लेकिन पुलिस ने बीकेयू नेताओं के खिलाफ थाना परिसर में डीजे बजाने, हुक्का पीने और अनुशासनहीनता के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया. इसके खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है. गुरुवार को किसानों ने थाने के बाहर डेरा डाल दिया.

आसपास के गांवों के किसान थाने पहुंच गए। भट्ठी चढ़ाने के बाद वहीं बैठ गए। देर रात पुलिस और प्रशासन किसानों को समझाने की कोशिश करता रहा, लेकिन किसान नहीं माने. जिद थी कि किसान नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं.

यह झगड़ा टिकैत के भतीजे की बाइक के चालान को लेकर शुरू हुआ।

पुलिस ने राकेश टिकैत के भतीजे की बाइक का चालान काट दिया था. इसके बाद 31 जनवरी को बीकेयू नेताओं ने एकत्र होकर गंगानगर थाने पर प्रदर्शन किया. इसके बाद पुलिस ने गंगानगर थाने में बीकेयू नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. बाइक गायब होने पर किसान चुप हो गए। लेकिन जब उन्हें पता चला कि पुलिस ने किसानों पर केस दर्ज किया है तो वह नाराज हो गए.

गुरुवार देर शाम मवाना में अचानक किसानों की पंचायत बुलाई गई. पंचायत में निर्णय लिया गया कि जब तक पुलिस मुकदमे वापस नहीं लेगी, तब तक किसान थाने पर धरना देंगे और नहीं उठेंगे.

किसानों पर लिखा वापस जाओ

प्लेटिनम पर प्लॉट के फैसले के बाद, किसान वाइटल-ट्रॉल्स ने प्लेटिनम गंगानगर स्टेशन पर परियोजनाएं शुरू कीं। पुलिस ने जैसे ही किसानों को थाने की ओर बुलाया तो थाने के सभी गेट बंद कर दिए गए. किसानों और आम जनता को भी थाने में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई.

किसान काफी देर तक थाने में बातचीत करते रहे लेकिन खुल नहीं सके। फिर किसानों ने दुकान के बाहर डेरियन प्लांटर लगा दिया. कुछ देर बाद सीटें और कुर्सियां भी आ गईं. किसानों ने बताया कि बारिश से बचने के लिए उन्होंने गेट लगाए थे। हुक्का जैम लिया.

पुलिस ने 40 किसानों पर केस दर्ज किया है

बुधवार रात किसानों द्वारा बाइक छुड़ाकर वापस ले जाने के बाद गंगानगर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बीकेयू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी, हर्ष चहल, नरेश मवाना, अमित कुंडू को नामजद करते हुए करीब 30-35 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

धारा 147, 332 और 341 के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस भी मामले की जांच में जुट गई. पुलिस ने कहा कि वे पूरी घटना के बने वीडियो से किसानों की पहचान कर रहे हैं. चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।

अफसरों ने समझाया, किसान नहीं माने

पुलिस अधिकारी किसानों से धरनास्थल से हटने के लिए कहते रहे, लेकिन किसान नहीं माने। दरअसल, देर रात तक आसपास के गांवों के किसान भी धरनास्थल पर जुटने लगे थे. किसानों की संख्या बढ़ती देख एडीएमई अमित सिंह, एसपी देहात कमलेश बहादुर सिंह भी मौके पर पहुंच गए।

अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। कहा कि किसानों को धरना छोड़ देना चाहिए, लेकिन किसान नहीं माने। किसानों ने साफ कहा कि जिस तरह से पुलिस ने निर्दोष किसान नेता अनुराग चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उसे वापस लिया जाना चाहिए. किसानों ने कहा कि जब तक पुलिस केस वापस नहीं लेती, हम यहीं धरना देते रहेंगे.

अपने हक़ की बात करना गुनाह है

किसानों ने कहा, पुलिस अपनी मनमानी कर रही है. पहला चालान टिकैत के भतीजे की बाइक का काटा गया. जब हमने नियमानुसार जुर्माना अदा किया तो हमारे किसान भाइयों पर मुकदमे दर्ज कर दिये गये। क्या अपने अधिकारों की बात करना भी गुनाह है? इससे नाराज किसान देर रात तक थाने के बाहर डेरा डाले रहे।

Continue Reading

उत्तरप्रदेश

Meerut: पांच साल पहले जब्त किये गए 22 ऊंटों को हज़म कर गई मेरठ पुलिस‚ हाईकोर्ट पहुंचा मालिक

Published

on

मेरठ: खबर यूपी के मेरठ से है‚ जहां साल 2019 में लिसाड़ी गेट पुलिस ने कुर्बानी के लिए आए 22 ऊंट को जब्त कर लिया था‚ लेकिन पांच साल बाद भी अभी तक मालिक को वापस नही किये।  ऊंटों को वापस लेने के लिए कई बार ऊंट मालिक ने पुलिस सहित प्रशासन से गुहार लगाई है। ऊंट नहीं मिलने पर ऊंट मालिक ने हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर मेरठ पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।

सांकेतिक चित्र

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्स-ऊ-जमां का कहना है कि जब पुलिस ने ऊंट पकड़े तो मालिक को वापस भी करना होगा। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कोतवाली ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। लिसाड़ी गेट इंस्पेक्टर से रिपोर्ट तलब की है।

मेरठ में वर्ष 2019 के अगस्त माह में ईद के दौरान मेरठ पुलिस व जिला प्रशासन ने ऊंट की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस दौरान 22 ऊंट लिसाड़ी गेट पुलिस ने पकड़ लिये थे। पुलिस ने उस समय बताया था कि सभी 22 ऊंट को संरक्षण केंद्र में भिजवा दिया गया है।

ऊंट मालिक मो. अनस का आरोप है कि पकड़े गए ऊंट उसे वापस नहीं मिले। जबकि इस संबंध में कई बार सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिक स्वामी के पक्ष में ऊंट को सौंपने का आदेश दिया गया था। इसके बाद 2022 में मो. अनस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ऊंट वापस दिलाने की गुहार लगाई गई।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्स-ऊ-जमां का कहना है कि हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2023 को आदेश पारित कर ऊंट वापस दिलाने को कहा है। इस आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। अब पुनः याचिका दायर की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रदेश सरकार के गृह सचिव, मेरठ मंडल की कमिश्नर, डीएम, एसएसपी और सिटी मजिस्ट्रेट को पार्टी बनाया गया है। सरकार और प्रशासन से ऊंट वापस दिलाने की गुहार लगाई गई है। जब पुलिस ने जब्त किया है तो वापस भी दिलाने का काम तो करेगी। 18 मार्च को हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई होगी।

22 ऊंट प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार श्री वास्तव ने कहा की माननीय न्यायालय का मामला है। इस पर कुछ नहीं कह सकते। पुलिस को पत्र लिख भेजा है जानकारी मिलने पर न्यायाल को अवगत करवा दिया जायेगा। वहीं सीओ कोतवाली आशुतोष कुमार ने कहा की पुराना मामला है पत्रवालियां निकलवाई जा रही है। उच्चाधिकारी और न्यायालय को अवगत करवा दिया जायेगा ।

Continue Reading

उत्तरप्रदेश

केजरीवाल के बाद अब अखिलेश को घेरने में जुटी BJP‚ दस साल पुराने में मामले CBI ने भेजा समन

Published

on

लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी एक-एक करके सभी विपक्षी दलों पर कानूनी शिकंजा कसती जा रही है‚ ताकि चुनाव में कोई उसे टक्कर न दे सके। कांग्रेस‚ टीएमसी‚ झामुमो और आम आदमी पार्टी के बाद अब निशाने पर यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को उन्हे अवैध खनन मामले में समन भेजा है। CBI ने अखिलेश को 29 फरवरी यानी गुरुवार को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।

अखिलेश

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश इस मामले में बतौर गवाह पेश होंगे। हालांकि, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि मीडिया से जानकारी मिली है कि CBI ने अखिलेश यादव को नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक ऑफिशियल रूप से नोटिस नहीं मिली है। बता दें कि साल 2012-13 में सीएम रहते खनन विभाग अखिलेश यादव के पास था, उस समय अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

क्या है पूरा मामला

दरअसल सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हमीरपुर में 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन का मामला सामने आया था। योगी सरकार बनने पर इस मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग एक्ट समेत कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला समेत सभी 11 लोगों को नामजद किया गया था। सीबीआई ने आईएएस अफसर बी. चंद्रकला के घर भी छापा मारा था। इस मामले में आईएएस बी. चंद्रकला और सपा एमएलसी रहे रमेश चंद्र मिश्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

IAS बी चंद्रकला पर भी लगे थे आरोप

साल 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो उसमें पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम सामने आया। इतना ही नहीं अखिलेश यादव सरकार में कई जिलों की डीएम रहीं बी. चंद्रकला पर भी आरोप लगे और उनके यहां भी छापेमारी हुई। वहीं पिछले काफी समय से अखिलेश यादव सीबीआई और ईडी को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे हैं। वे लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव के वक्त सरकार सीबीआई और ईडी को राजनेताओं पीछे लगा देती है। ऐसे में अब सीबीआई के समन पर भी यूपी की सियासत गरमाने वाली है। माना जा रहा है कि सीबीआई अखिलेश यादव को गिरफ्तार भी कर सकती है।

 

Continue Reading

उत्तरप्रदेश

लखनऊ: कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही अकबरनगर में गरजा योगी का बुल्डोजर‚ सैकड़ों लोग किये बेघर और बेरोजगार

Published

on

लखनऊ: विकास और कथित अतिक्रमण के नाम पर बीजेपी सरकार देश भर में अब तक लाखों लोगों को बेघर- बेरोजगार कर चुकी है। इस कड़ी में अब लखनऊ के अकबरनगर में रह रहे हजारो लोगों का भी नंबर आ चुका है। सोमवार को जैसे ही हाईकोर्ट ने रोक हटाई‚ वैसे ही योगी सरकार हरकत में आ गई और अकबरनगर में दर्जनों बुल्डोजर 50 साल पुरानी इस बस्ती को ढहाने पहुंच गए।

सोमवार शाम से ही योगी सरकार के बुल्डोजर लगातार कहर ढाह रहे हैं। मंगलवार को दूसरे दिन भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है. एलडीए ने सुबह से शाम तक 150 से ज्यादा मकानों और दुकानो को नेस्तनाबूद कर दिया। इस बीच हाईकोर्ट ने जीएसटी और इनकम टैक्स चुकाने वाले कब्जाधारियों की याचिका खारिज कर दी. इनमें फैजाबाद रोड के 24 शोरूम संचालक भी शामिल हैं। शाम साढ़े चार बजे कोर्ट के फैसले की कॉपी मिलते ही एलडीए का बुलडोजर शोरूम की ओर बढ़ गया। शोरूम को ध्वस्त करते समय अयोध्या रोड को पूरी तरह खाली करा लिया गया। जब तोड़फोड़ शुरू हुई तो आधे किलोमीटर तक सिर्फ धूल का गुबार नजर आ रहा था. शाम को शुरू हुई कार्रवाई देर रात तक जारी रही।

आपको बता दें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने दो माह पहले 50 साल पुराने अकबरनगर में कुकरैल स्थित जमीन पर अवैध कब्जा बताकर ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें अयोध्या रोड पर बनी 101 दुकानें और शोरूम भी शामिल हैं। इनमें से 24 शोरूम मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में तब कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

लेकिन सोमवार को हाईकोर्ट ने याचिका दायर न करने वालों के अवैध निर्माण गिराने की इजाजत दे दी थी. इस पर एलडीए ने सोमवार से अभियान शुरू कर दिया था। यह अभियान मंगलवार को भी जारी रहा. सुबह से दोपहर तक 80 झुग्गियां हटाई गईं। इस बीच हाई कोर्ट ने शोरूम मालिकों की याचिका खारिज कर दी.

हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के दस मिनट के भीतर शोरूम के रैंप तोड़े जाने लगे। इसके बाद कई बुलडोजर एक साथ लगाए गए। सबसे पहले ताजमहल फर्नीचर पर कार्रवाई शुरू हुई। अगले 10 मिनट में सभी 24 शोरूम पंक्चर कर दिए गए और एक घंटे में छह दुकानें ध्वस्त कर दी गईं। बाकी दुकानें भी 50 प्रतिशत तक तोड़ दी गईं। इसके बाद रात में भी कार्रवाई जारी रही।

रोती रही महिलाएं‚ बिलखते रहे बच्चे

प्रशासन की इस कार्रवाई से अकबरनगर के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। अपना आशियान छिन जाने से लोग काफी हताश और मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं। वहीं प्रशासन अपनी कार्रवाई में पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है।

रात में अभियान जारी रखने के लिए पूरे इलाके में हाइड्रोजन लाइटें भी लगाई गईं। सुरक्षा के लिहाज से पूरा रास्ता बंद रखा गया। कार्रवाई के दौरान एलडीए वीसी डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह, डीसीपी रवीना त्यागी समेत कई अफसर मौजूद रहे। पुलिसकर्मी गलियों में गश्त करते रहे, पूरे इलाके में चार ड्रोन से नजर रखी गई और भीड़ जुटने से रोकने के लिए अनाउंसमेंट भी किया जाता रहा।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2017 Zox News Theme. Theme by MVP Themes, powered by WordPress.