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“एक था विलैन” जो मनचाही फीस न मिलने पर छोड़ देता था फिल्म

जानकार बताते हैं कि उन्होंने एन.एन. सिप्पी की एक फिल्म इसलिए छोड़ दी थी कि क्योंकि उन्हें मांग के मुताबिक 80 लाख रुपए नहीं दिए जा रहे थे।

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Author: Neeraj gola

Amrish puri birthday special/ Mumbai: -आज भी अगर बॉलीवुड में सबसे मशहूर विलेन के बारे में बात होती है सभी की जुबान पर सिर्फ एक ही नाम आता है और वो है अमरीश पुरी [Amrish Puri]। जिन्होंने अपने जीवन काल में 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 22 जून यानि आज उनका जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े कुछ अनकहे किस्से बता रहे हैं।

फोटो- सोशल मीडिया

अमरीश पुरी [Amrish Puri] वैसे तो विलेन के खतरनाक रोल किया करते थे लेकिन आम जीवन में अमरीश पुरी बहुत ही खुश मिजाज और सादगी जीवन जीने वाले इंसान थे। उनका जन्म जालंधर पंजाब में हुआ था। वह चार भाई और एक बहन में सबसे बड़े थे। उनके भाइयों के नाम मदन पुरी, चमन पुरी, हरीश पुरी थे।

उनकी पत्नी का नाम चंद्रकांता था। अमरीश पुरी ने 1957 में उर्मिला दिवेकर से शादी की थी जिनसे उनके दो बच्चे हुए। इनमें बेटा राजीव पुरी और बेटी नम्रता पुरी है। बेटा राजीव मर्चेंट नेवी में है तथा बेटी नम्रता एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अमरीश पुरी 12 जनवरी 2005 इस दुनिया को छोड़ कर चले गए।


40 वर्ष की उम्र में मिला था पहला रोल
अमरीश पुरी को एक्टिंग का बहुत शौक था लेकिन उन्हें काम के नाम पर निराशा ही हाथ लगी। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक्टिंग करते रहे। उन्हाेने थिएटर की तरफ रुख किया। वहीं 1970 में उन्होंने देवानंद की फिल्म “प्रेम पुजारी” में पहला छोटा सा रोल प्ले किया। डायरेक्टर ने उन्हें कई फिल्मों के लिए साइन किया परंतु फिल्मों में उन्हें ज्यादा रोल नहीं मिल पाया जिसकी वजह से उन्हें अपनी पहचान बनाने में काफी समय लगा।


पहचान दिलाने में दुर्योधन के किरदार की रही अहम भूमिका

वैसे तो अमरीश पुरी को श्याम बेनेगल की फिल्म निशांत मंथन और भूमिका जैसी फिल्मों में काम मिला लेकिन उन्हें असली जो पहचान मिली थी वो 1980 में आई “हम पांच” थी। इस फिल्म को उन्होंने “दुर्योधन” का किरदार निभाया था जो लोगों ने बहुत पसंद किया। उसके बाद तो इन्हें एक के बाद एक फिल्म में मिलती गई।

विधाता, हीरो, सौदागर ,करन- अर्जुन, कोयला जैसी फिल्मों ने अमरीश पुरी को खलनायक के तौर पर सुपरहिट कर दिया।” मिस्टर इंडिया” में भी मशहूर किरदार “मोगेंबो खुश हुआ” डायलॉग काफी फेमस हुआ। इसके अलावा फ़िल्म DDLJ का संवाद “जा सिमरन जा – जी ले अपनी ज़िन्दगी” भी खूद मशहूर हुआ। यह डायलॉग व्यक्ति का वह रूप सामने लाता है जो खलनायक के परिवर्तित हृदय का द्योतक है।


मनचाही फीस न मिलने पर छोड़ दिया करते थे फिल्म
अमरीश पुरी साहब के बारे में यह कहा जाता है कि अगर फिल्म के लिए उन्हें मनचाही फीस नहीं मिलती तो वे फिल्म ही छोड़ दिया करते थे। वो कहते थे कि जब मैं अभिनय के साथ कोई समझौता नहीं करता तो फीस के साथ समझाैता क्यों करूं। जानकार बताते हैं कि उन्होंने एन.एन. सिप्पी की एक फिल्म इसलिए छोड़ दी थी कि क्योंकि उन्हें मांग के मुताबिक 80 लाख रुपए नहीं दिए जा रहे थे। आज भी उनके काम की वजह से लोग उन्हें जानते हैं और बॉलीवुड में अब तक के सबसे खतरनाक विलेन में उनका नाम पहले नंबर पर शुमार है।

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