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क्राइम

UP: बिजनौर में ‘पैंगोलिन’ की तस्करी में STF जवान सहित 15 गिरफ्तार

पैंगोलिन (Pangolin) उन संकटग्रस्त जीवों की प्रजाति में शामिल है, जिनकी संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है. पैंगोलिन की हड्डियों, मांस और खाल की तस्करी की जाती है। फरवरी के तीसरे शनिवार को विश्व भर में ‘विश्व पैंगोलिन दिवस’ मनाया जाता है।

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Manoj kumar

पैंगोलिन Pangolin

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने सोमवार को पैंगोलिन (pangolin) के साथ एसटीएफ के एक सिपाही सहित 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन की कीमत चार करोड़ रुपये बताई गई है। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची है। पुलिस पूरे मामले में छानबीन कर रही है। इसमें कुछ रसूखदारों का भी हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

क्या होता है ‘पैंगोलिन’

पैंगोलिन (pangolin) फोलिडोटागण का एक स्तनधारी प्राणी है। यह एक गहरे-भूरे या पीले-भूरे रंग का शुंडाकार जीव है। यह कुछ-कुछ सांप और छिपकली की तरह दिखाई देता है। इसके शरीर पर केराटिन के बने शल्क (स्केल) नुमा संरचना होती है जिससे यह अन्य प्राणियों से अपनी रक्षा करता है। पैंगोलिन ऐसे शल्कों वाला अकेला ज्ञात स्तनधारी है। यह मूल रूप से अफ़्रीका और एशिया में पाया जाता है। भारत में इसको सल्लू साँप भी कहते है।अंधविश्वास के कारण अक्सर इनका शिकार किया जाता है। जिसकी वजह से पैंगोलिन की सभी जातियां संकटग्रस्त  मानी जाती हैं और उनकी प्रजाति पर विलुप्ति का ख़तरा मंडरा रहा है।

पैंगोलिन की तस्करी दुनिया मे सबसे ज्यादा

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक, यह एक ऐसा जानवर है, जिसकी तस्करी पूरी दुनिया में सबसे अधिक होती है। दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में 20 फीसदी पैंगोलिन की तस्करी होती है। क्योंकि इसकी खाल और मांस से पारंपरिक दवाइयां बनाई जाती हैं। खासतौर पर चीन में इस जानवर की अधिक डिमांड है।

दवा बनाने में आता है काम

ये एक बेहद सीधा जीव है जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। इस जीव का दूसरा सबसे बड़ा इस्तेमाल ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन बनाने में होता है। पैंगोलिन के मांस से अलग दवाएं बनती हैं, तो इसके स्केल्स से अलग किस्म की दवा बनती हैं। हर दवा का उपयोग अलग बीमारी के लिए होता है। इस जीव से बनने वाली दवाएं काफी महंगे दामों पर बिकती हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब पैंगोलिन विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गए हैं।

चींटियां और दीमक खाकर गुजारा करते हैं पैंगोलिन

लगभग 60 मिलियन सालों से धरती पर मौजूद पैंगोलिन प्राणी शर्मीली प्रवृति का जीव है। ये जीव चींटियां खाकर गुजारा करते हैं। शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स वाले इन जीवों का मांस भी खूब शौक से खाया जाता है।बताया जाता है कि एक किलो पैंगोलिन के मांस की कीमत करीब 27,000 रुपये तक होती है। वेट मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ पैंगोलिन नहीं बिकता, बल्कि महंगे रेस्त्रां ही इसे बेचते या पकाते हैं। 

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