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Meerut: डॉक्टर ने रिसेप्शनिस्ट पर लगाया चोरी का झूठा आरोप‚ युवती ने क्लीनिक पर ही कर लिया सुसाइड

Meerut: मेरठ में पल्लवपुरम थाना क्षेत्र अंतर्गत गीतांजलि बांद्रा क्लीनिक पर काम करने वाली रिसेप्शनिस्ट [Receptionist] ने क्लीनिक पर ही जहर खाकर आत्महत्या [suicide] कर ली। बताया जा रहा है कि डॉ. गीतांजलि ने रिसेप्शनिस्ट तनु पर 2 हजार रूपए चोरी करने का झूठा इल्जाम लगाया था‚ जिसके बाद युवती ने यह घातक कदम उठा लिया।

मृतक तनु का [फाइल फोटो]

हैरान करने वाली बात यह है कि इस मामले में मृतक युवती के पिता ने महिला डॉक्टर के खिलाफ थाने में तहरीर दी है लेकिन घटना के 4 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस डॉक्टर से सांठ-गांठ में लगी हुई है और परिजनों पर फैसले का दबाव बनाया जा रहा है।

मामले में जानकारी देते हुए मृतक लड़की के पिता जोगेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी तनु पल्लवपुरम में गीतांजलि बांद्रा क्लीनिक पर पिछले 8 माह से रिसेप्शनिस्ट का कार्य कर रही थी। पिता के अनुसार 31 जुलाई को दोपहर 12:00 बजे क्लीनिक पर एक मरीज का तीमारदार आया जिसने अपना बैग रिसेप्शन पर छोड़ दिया।

डॉक्टर ने किया सबके सामने बेइज्जत

रिसेप्शनिस्ट तनु ने कुछ देर बाद लोगों से पूछा कि यह बैग किसका है‚ तो उस व्यक्ति ने कहा कि मेरा है। तनु ने उसे अपना बैग उठाने के लिए कहा। आरोप है कि उस व्यक्ति ने बैग से 2 हजार रूपए चोरी करने का आरोप रिसेप्शनिस्ट तनु पर लगा दिया। तनु ने रोते हुए अपनी तरफ से लाख सफाई दी लेकिन किसी ने उसकी नही सुनी। हद तो तब हो गई जब खुद डॉक्टर गीतांजलि बांद्रा में तनु पर पैसे चोरी करने का आरोप लगाते हुए सबके सामने उसे बेइज्जत करना शुरू कर दिया।

CCTV फुटेज चैक करने के बाद ली तलाशी

महिला डॉक्टर यहीं नही रूकी‚ उसने CCTV फुटेज चैक किया और फिर तनु के सारे कपड़ों की तलाशी भी ली लेकिन तनु न ही तो CCTV कैमरे में बैग छेड़ती हुई नजर आई और ना ही उसके कपड़ों से रूपए बरामद हुए। बावजूद इसके महिला डॉक्टर ने उसे सबके सामने अपमानित करना बंद नही किया। अपमानित किए जाने से रिसेप्शनिस्ट तनु मानसिक रूप से इतनी परेशान हुई कि उसने कुछ देर बाद क्लीनिक पर ही जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालत में उसे ग्लोबल नर्सिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां शाम तक उसकी मौत हो गई।

डॉक्टर ने कराया जबरन अंतिम संस्कार

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हे पुलिस केस और बदनामी का डर दिखाकर दबाव बनाया कि वह पोस्टमार्टम के बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दे। डॉक्टरों के बहकावे में आकर परिजनों ने रात में ही बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया‚ लेकिन जब यह बात अन्य ग्रामीणों को पता चली तो उन्होंने हंगामा करते हुए डॉ गीतांजलि बांद्रा पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। मामले में परिजनों ने पल्लवपुरम थाने में लिखित तहरीर दी लेकिन पुलिस ने 4 दिन गुजरने के बाद भी इस मामले में अभी तक डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया है।

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इंस्पेक्टर पल्लवपुरम से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होने कहा कि इस मामले में मुकदमे का कोई आधार नही है। लड़की ने खुद ही जहरीला पदार्थ खाया है। डॉक्टर ने अपने बच्चे की तरह उसे केवल डांटा था। इंस्पेक्टर ने अपनी बात सही ठहराने के लिए अपना और अपने पिता का उदाहरण भी दे डाला। शायद इंस्पेक्टर पल्लवपुरम यह भूल गए की सही-गलत तय करना पुलिस का काम नही कोर्ट का है।

दूसरी ओर परिजनों का आरोप है कि पुलिस डॉक्टरों से मिली हुई है और इस मामले को दबाने में जुटी हुई है। कुछ डॉक्टर घर पर आकर भी फैसले का दबाव बना रहे हैं। फिलहाल परिजनों ने एसएसपी से मुलाकात कर इस मामले में कार्रवाई की मांग करने की बात कही है। परिजनों का कहना है कि वो बुधवार को SSP से मामले की शिकायत करेंगे।

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