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क्राइम

जान दे रही हूँ मेरे पति को मेरी शक्ल भी मत देखने देना, मुखाग्नि तो दूर, जानिए क्या है मामला  

ऐसा माना जाता है कि पति-पत्नी का रिश्ता 7 जन्मों का होता है, लेकिन इंदौर में एक पत्नी अपने जीवन साथी से इतनी दुखी हो गई कि उसने आत्महत्या जैसा भयावह कदम उठा लिया। महिला के पास से बरामद सुसाइड नोट ने उसके पति को पूरी तरह से उजागर कर दिया। महिला के पति जीत जी उसे कोई खुशी नहीं दे सके। इसलिए उसने चलते-चलते ऐसी सजा दी कि वह जीवन भर याद रखेगा। पत्नी ने सुसाइड नोट में अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की कि उसकी मृत्यु के बाद न तो उसके पति को अंतिम दर्शन करने की अनुमति दी जाए और न ही मुखाग्नि दी जाए। पति से मुखाग्नि का अधिकार छीनकर अपनी माँ या बहन को यह अधिकार दिया है।

मृत्यु से पहले लिखे गए सुसाइड नोट में उसने पैसो के बारे में भी उल्लेख किया है कि यह बेहतर होता अगर पैसा किसी जीवित व्यक्ति से बड़ा नहीं होता। मैं अपनी खुशी के साथ आत्महत्या कर रही हूं, आप सभी अपना ख्याल रखें और मेरे पति को अंतिम दर्शन न करने देना।  पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला दर्ज किया और महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

दरअसल, इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र के लेक पैलेस कॉलोनी में रहने वाली कल्पना नामदेव की शादी 5 साल पहले विदिशा में रहने वाले नीलेश नामदेव से हुई थी। शादी के बाद कुछ समय के लिए, पति और पत्नी के बीच सब कुछ ठीक रहा।  लेकिन आखिरकार पति नीलेश को भी दहेज का लालच चढ़ा और उसने अपनी पत्नी को उसके नाम पर पिता का घर नाम करवाने के लिए परेशान करना शुरू कर दिया।

पारिवारिक विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस स्टेशन में पति के खिलाफ दहेज का मुकदमा दायर कर दिया, दोनों का अदालत में तलाक का मामला चल रहा है, लेकिन दहेज लोभी पति से उसकी पत्नी कल्पना को इतना उत्पीड़न मिला कि उसे अपनी जिंदगी से जीवन लीला समाप्त करना आसान लगा। कल्पना के अंदर इतना तनाव था कि वह अपने मायके इंदौर आई ओर उसने पति द्वारा अत्याचार के बारे में एक पेज पर सुसाइड नोट लिखकर अंत में उसने अपने घर में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

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