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क्राइम

शर्मनाक यूपी: तारों से जातियों में बांट दिया श्मशान, एक तरफ जलते है अगड़ी जाति के मुर्दे, तो दूसरी तरफ दलित जाति के मुर्दे

मनोज कुमार

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार, भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है, लेकिन जातिगत भेदभाव अभी भी विकास की राह में बाधा बना हुआ है। ताजा मामला बुलंदशहर के पहासू का है। श्मशान भूमि को मानवता को शर्मसार करते हुए दो भागों में बांटा गया था। एक तरफ ऊंची जाति के लोग दूसरी तरफ दलितों के शव जलाते हैं।  ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के मद्देनजर ऐसा किया गया है।

जानिए क्या है मामला?

दरअसल, पहासू प्रखंड के बनैल गांव में यहां के श्मशान घाट को जाति के आधार पर विभाजित किया गया है। गांव में श्मशान घाट का निर्माण 2017 में किया गया था। कुछ समय बाद इसे दो भागों में विभाजित किया गया। यह गाँव राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया का पैतृक गाँव होने के लिए प्रसिद्ध है, जो आरएसएस के प्रमुख थे। दाह संस्कार स्थल को दो भागों में इस तरह से किया गया है जैसे कि यह दो देशों की सीमा हो। इसके एक भाग में अगड़ी जातियों के लोगों के शव जलाए जाते हैं, जबकि शमशान स्थल पर तार लगाकर दूसरा हिस्सा दलितों के लिए बना दिया है। यानी बनैल गांव में बने इस श्मशान में मृतकों की जाति देखकर दाह संस्कार किया जाता है।

ग्रामीणों को बाड़ लगाना गलत

इस संबंध में ग्रामीण सचिन राघव, गौरव चौहान का कहना है कि जातिगत भेदभाव के कारण इस तरह का प्रतिबंध लगाना गलत है। लेकिन जब यहां प्रतिबंध था, तो किसी ने भी इसका कड़ा विरोध नहीं किया।  अगर ऐसा किया गया होता तो शायद ऐसी कोई तस्वीर बुलंदशहर के इस गांव से बाहर नहीं आती।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी – पहासू बीडीओ

उधर, पहासू के बीडीओ घनश्याम वर्मा का कहना है कि मामला अब उनके संज्ञान में आया है और मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, वीडियो सामने आने के बाद मामले की जानकारी मिली है। जांच की जा रही है।  दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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