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क्राइम

आगरा दरोगा हत्याकांड: पारिवारिक विवाद को मामूली समझना पुलिस की बड़ी भूल

उदयवीर सिंह

घटना के बाद जरूरी निर्देश देते एडीजी और आईजी

आगरा: बुधवार सुबह से ही खंदौली के गांव नाहरा में शिवनाथ और विश्वनाथ के बीच विवाद चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस भी दोपहर में गांव में आई थी। वह विश्वनाथ को निर्देश देकर चली गई। शाम को उसने फिर विवाद किया। दरोगा प्रशांत कुमार यादव और कांस्टेबल चंद्रसेन उसे पकड़ने आए।  उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि आरोपी गोली मार देगा।

शहीद दरोगा प्रशांत कुमार यादव

ग्रामीणों ने बताया कि दोनों बेटों को बराबर खेत देने के बाद विजय सिंह ने सात बीघा जमीन अपने पास रख ली है। उनके बड़े बेटे शिवनाथ ने इस खेत में आलू की फसल बोई थी। खुदाई के बाद, कुछ आलू कोल्ड स्टोर पर चले गए। कुछ शिवनाथ ने अपने घर भेज दिए। छोटे भाई विश्वनाथ ने भी अपने पिता के खेत में आधे आलू मांगे थे। कहा गया कि यह हिस्सा मां का होना चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार दोनों भाइयों के बीच सुबह से ही विवाद चल रहा था। रिश्तेदार और परिवार विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे।112 पर कॉल कर मामला पुलिस तक पहुंचा।

पुलिस के सामने शिवनाथ ने तर्क दिया था कि उन्होंने अपने पिता के खेत पर खेती करने के बदले में किराया दिया है। वह अपनी फसल से किसी को हिस्सा नहीं देगा। पुलिस भी उसके तर्क से सहमत थी। पुलिस ने शिवनाथ को शांति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। शिवनाथ के पास गाँव में एक दूध डेयरी भी है। शाम को दूधियों के आने का समय हो गया था। इस बीच, छोटे भाई विश्वनाथ ने फिर से हंगामा खड़ा कर दिया।  बड़े भाई ने पुलिस को इस बारे में सूचित किया।

सूचना पर हल्का इंचार्ज प्रशांत कुमार यादव और कांस्टेबल चंद्रसेन गांव में पहुंचे। इसी दौरान विश्वनाथ ने तमंचे से दरोगा को गोली मार दी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस ने दोपहर में विश्वनाथ को पकड़ा होता तो ऐसा नहीं होता। हालांकि दिन में शिकायत के बाद पुलिस ने इस मामले को मामूली घरेलू विवाद समझने की बड़ी भूल कर दी। पुलिस ने दिन भर यह सोचकर कार्रवाई नहीं की कि पारिवारिक मामला है, परिवार के लोग आपस में बैठकर हल करेंगे। आगरा पुलिस की यह छोटी चूक उनको इतनी भारी पड़ेगी यह कोई नही जानता था। जिस कारण यूपी पुलिस के साहसी इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार यादव को अपनी जान गंवानी पड़ी।

शहीद दरोगा के परिवार को हर संभव मदद की घोषणा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद उपनिरीक्षक के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शहीद दरोगा के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। जिला मजिस्ट्रेट प्रभु एन सिंह ने कहा कि सरकार स्तर से वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की गई है।  शहीद दरोगा के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और उनके नाम पर जिले में एक सड़क का नाम रखने की घोषणा शासन स्तर से की गई है। उन्होंने बताया कि शहीद दरोगा के परिवार को सरकारी स्तर से हर संभव सहायता प्रदान करने की भी घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार शहीद दरोगा के परिवार के साथ है।   उन्हें उनकी कमी महसूस होने नहीं दी जाएगी।

सरकार ने इंस्पेक्टर को शहीद का दर्जा दिया

सरकार ने साहसी दरोगा प्रशांत कुमार यादव को शहीद का दर्जा दिया है। यह जानकारी एडीजी जोन राजीव कृष्ण ने दी। वह देर रात तक मौके पर रहे। आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को क्या करना है। ये निर्देश दिए। एसएसपी बबलू कुमार और आईजी रेंज ने मौके पर आधा दर्जन से अधिक टीमों का गठन किया। देर रात हत्यारे विश्वनाथ की भी खेतों में तलाश की गई।  जिले की सीमाएं सील कर दी गईं। ताकि वह भागने से बच सके। पुलिस ने उसकी पहचान के लोगों के घरों पर छापा मारा।

दरोगा और सिपाही ने हिम्मत दिखाई

एडीजी जोन राजीव कृष्ण का कहना है कि शिवनाथ ने गांव नाहरा से सूचना दी थी कि छोटे भाई विश्वनाथ हंगामा कर रहे हैं। इस सूचना पर अधिकारी प्रशांत कुमार और कांस्टेबल चंद्रसेन गांव में पहुंचे। आरोपी के हाथ में बंदूक देखकर पुलिसकर्मी और सिपाही ने हिम्मत दिखाई।  उसके पीछे भागे विश्वनाथ ने गोली मारी। जिस कारण दरोगा प्रशांत कुमार शहीद हो गए। यह एक बहुत दुखद घटना है। आगरा पुलिस तब तक चैन की सांस नहीं लेगी, जब तक आरोपी पकड़ा नहीं जाता। कई टीमें लगाई गई हैं। हत्यारे के जल्द ही गिरफ्तार होने की उम्मीद है।

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