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Meerut: कुश्ती कोच जबर सिंह को द्रोणाचार्य अवार्ड देने के लिए उठी मांग‚ खेल मंत्री को लिखा पत्र

कोच जबर सिंह सोम 26 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती खिलाडी व 50 से ज्यादा राष्ट्रीय खिलाडी देश को दे चुके हैं। बावजूद सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं।

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Author: Neeraj Gola

Meerut: कुश्ती खेल में बेटियों को बेटों के बराबर लाकर खड़ा करने वाले मेरठ के सीनियर कुश्ती कोच डॉ. जबर सिंह सोम [ Wrestling Coach Dr. Jaber Singh Som] द्रोणाचार्य अवार्ड [ Dronacharya Award] के हकदार हैं। उन्होंने अपने 4 दशक से ज्यादा के खेल करियर में बेटियों के हौंसला देकर उनके सपनों का आकार दिया।

डॉ. जबर सिंह सोम पिछले 12 सालों से द्रोणाचार्य अवार्ड के हकदार होने के बावजूद उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। उनकी शिष्या कुश्ती में अर्जुन अवार्डी अलका तोमर [ Arjuna Awardee Alka Tomar] ने केंद्र सरकार से द्रोणाचार्य अवार्ड देकर हक देने की बात कही है।

कोच डॉ. जबर सिंह सोम और महिला पहलवान अलका तोमर‚ फोटो- सोशल मीडिया

29 अगस्त खेल दिवस पर केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा इस अवार्ड के लिए उनके अंकों के अनुसार इस अवार्ड को देने का कष्ट करें। इस सम्बंध में पूर्व अंतर्राष्टीय टेंनिस बॉल क्रिकेट खिलाड़ी साथ ही खेल प्रोत्साहन समिति श्रम कल्याण परिषद, उ०प्र० सरकार के सदस्य नमन भारद्वाज ने भी इस सम्बंध में श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री सुनील भराला को इस विषय मे पत्र लिखकर इस विषय से अवगत कराया है।

राज्यमंत्री सुनील भराला ने सकरात्मक उत्तर देते हुए हर सम्भव मदद करने की बात कही साथ ही केंद्रीय खेल मंत्री को भी इस विषय से अवगत कराने की बात कही जिसमे केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजूजू को भी पत्र लिखा जाएगा।


मूल रूप से सरधना के कालन्दी निवासी 67 वर्षीय डॉ. जबर सिंह सोम सीसीएसयू में कुश्ती कोच हैं। उन्होंने विवि हॉल से बेटियों को कुश्ती में वो जगह दिलाई जिसकी वो असली हकदार हैं। 1967 से 2006 तक देश में किसी महिला ने कुश्ती में पदक नहीं जीता था।

कुश्ती खिलाडी मेरठ निवासी अलका तोमर ने देश को पहला पदक दिलाया था। कोच जबर सिंह सोम की बदौलत 39 साल का पदकों का सूखा समाप्त कर देश में बेटियों को लेकर नजरिया बदला था। जिसके बाद अलका ने एशियन व कामनवेल्थ गेम्स में पदक हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

अलका तोमर के सफल होने के बाद परिवारों ने मेरठ में बेटियों को कुश्ती खेल में भेजने की शुरुआत कर दी। इससे पहले बेटियों को खेल तो दूर घरों से बाहर निकलने तक कि इजाजत नहीं होती थी। आज के समय मे सौ से बेटियां उनके अखाड़े में प्रशिक्षण ले रही हैं। महिला खिलाडी लडकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कुश्ती के गुर सीख रही हैं।


26 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाडी दे चुके


कोच जबर सिंह सोम 26 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती खिलाडी व 50 से ज्यादा राष्ट्रीय खिलाडी देश को दे चुके हैं। अलका तोमर ने बताया पिछले साल 29 अगस्त को द्रोणाचार्य अवार्ड न मिलने के कारण उन्हें आपत्ति जताई थी। पिछले 12 सालों से फाइल खेल विभाग को भेजी जा रही है। लेकिन उनसे पहले जूनियर कोचों को अवार्ड दे दिया गया।

नमन भारद्वाज ने बताया कि उनकी अर्जुन अवार्डी पहलवान अलका तोमर से इस सम्बंध में बात हुई है जिसमे तय हुआ कि हर सम्भव प्रयास से कोच जबर सिंह को द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिलाने का प्रयास किया जाएगा। चाहे इसके लिए सभी युवा-खिलाड़ियों एवं पहलवानो के साथ धरने पर बैठना पड़े बैठेगे।

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