Car Loan: कार फाइनेंस कराने जा रहे हैं तो जान लो यह बातें‚ नहीं तो उठाना पड़ेगा भारी नुकसान

रितु शर्मा– ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (automobile industry) में नए वाहनों ने धूम मचा रखी हो और ऑटो एक्सपो (auto Expo) जैसे बड़े आयोजन आपको ऑटोमोबाइल्स (automobiles) की खूबसूरत दुनिया की झलक रोज दिखा रहे हों, तो एक अदद कार खरीदने के लिए सोचना लाजिमी है। लेकिन कार खरीदना कोई सरल निर्णय नहीं होता है।

Car lon

इसके बारे में सोचते ही बैंक से लोन लेना सबसे कारगर उपाय लगता है। पर, कार खरीदना केवल इसके लिए लोन लेना भर नहीं है। खर्चे की बात करें, तो बिक्री कर और लाइसेंस हस्तांतरण, बीमा और अन्य शुल्क भी इसके साथ आते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं। कार खरीदने में पैसे से संबंधित उलझनों पर कुछ सलाह:

नकद या कार लोन

ऐसा हो सकता है कि आपके पास इतनी रकम हो कि कई लाख रुपयों की कार को आप एक मुश्त खरीदने की सोच सकें। ऐसे में यह जान लेना भी सही होगा कि इतनी बड़ी रकम को एक बार में ही चुकाना आपके हित में जाएगा या नहीं? इंडस्ट्री के लोगों की राय में एकमुश्त भुगतान करने पर आपको कार खरीद में बेहतर डील मिल सकती है।

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ब्याज की रकम से छुटकारा मिलता है और इसीलिए इसे समझदारी भरा निर्णय माना जाता है। लेकिन यह भी ध्यान रखें कि इस तरह आपका इमरजेंसी फंड खाली हो सकता है। कई बार एक मुश्त भुगतान में खरीद करने पर डीलर कई सारे ऑफर्स हटा देते हैं। इसके लिए आपको पहले से बात करनी होगी। साथ ही क्रेडिट स्कोर बनाने का मौका भी खत्म हो जाता है। क्योंकि, अच्छा क्रेडिट स्कोर दूसरा लोन लेने में बड़ा कारगर हो सकता है।

जरूरी दस्तावेज तैयार रखें

लोन आवेदन प्रक्रिया के लिए आय, पता, आयु, रोजगार आदि के प्रमाण आवश्यक होते हैं। इसलिए, जानें कि ऋणदाताओं को आमतौर पर किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है और उन्हें ऋण आवेदन से पहले तैयार कर लें। उदाहरण के लिए तनख्वाह पा रहे लोगों के लिए सैलरी स्लिप और हालिया आयकर रिटर्न स्टेटमेंट सामान्य रूप से आवश्यक होते हैं। कई बार डीलर की ओर से डॉक्यूमेंट्स के बारे में स्पष्ट नहीं किया जाता। और ऐन वक्त पर काम रुकता है। इसलिए अपनी ओर से इस बारे में पूछकर जरूरी कागजों की तैयारी पूरी रखें।

कैसे करें किस्तों के बारे में निर्णय

कार लोन की किस्तों के बारे में आप अपनी मासिक आय से अपने अनिवार्य मासिक खर्चा, महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्यों के लिए मासिक निवेश बीमा प्रीमियम, वर्तमान में चल रही अन्य ईएमआई के खर्ची आदि को घटाकर बढ़ी राशि से अपनी ईएमआई सामर्थ्य जान सकते हैं। एक बार जब आप अपनी ईएमआई साम को जान लेंगे तो ब्याज लागत को कम करने के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपयुक्त अवधि के लोन का विकल्प चुनने में स्पष्टता रहेगी।

अपना क्रेडिट स्कोर जानें

कार लोन लेने से पहले अपना सिबिल (क्रेडिट) स्कोर जरूर जानें। इस तरह आपको अंदाज लग जाएगा कि आपको कार लोन की शर्तों में क्या ऑफर होगा और आप कितना लोन दिए जाने के योग्य पाए जाएंगे। लोन पर ब्याज दरें आय के स्रोत, लिंग और क्रेडिट स्कोर जैसी चीजों को देखकर तय की जाती है। अगर क्रेडिट स्कोर कम है और कार खरीदने की जल्दी भी नहीं है, तो आप थोड़ा रुक कर क्रेडिट स्कोर बेहतर कर सकते हैं। ताकि उसके बाद लोन पर जो ब्याज दर प्रस्तावित हो, वह कम हो।

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इसी तरह यदि आपकी आय अधिक है, लेकिन क्रेडिट स्कोर खराब है, तो ब्याज दर अभी भी ज्यादा हो सकती है। लोन देने वाले संस्थान आवेदकों की क्रेडिट रिपोर्ट जरूर देखते हैं। 750 और उससे अधिक के क्रेडिट स्कोर वाले लोगों के लिए आमतौर पर लोन स्वीकृति की अच्छी संभावना बनती है। कोई भी अपना क्रेडिट स्कोर ऑनलाइन अकाउंट से या क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट से निशुल्क ले सकता है। कम से कम छह महीने पहले से नियमित अंतराल पर क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर रखें।

 

समझें डाउन पेमेंट को

डाउन पेमेंट का अर्थ है किसी भी वस्तु की खरीद में तत्काल अदा की गई रकम। डाउन पेमेंट की कम राशि का मतलब है कि आपको लोन की बड़ी रकम को ईएमआई में बदलना होगा, जिस पर भविष्य में ब्याज की लागत ज्यादा वहन करनी होगी। उदाहरण के लिए अगर आप 10 लाख रुपये ऑनरोड कीमत की कार लेते हैं, तो 2 लाख रुपये का डाउन पेमेंट हो, जिस पर 8 लाख रुपये को सात साल (सामान्यतः लिया जाने वाला लोन अवधि) के लिए ईएमआई में बदलना होगा। ऐसे मामले में, अपनी सभी ईएमआई का भुगतान करने तक (10% कार ऋण ब्याज दर मानते हैं) आप 3.15 लाख रुपये का अतिरिक्त ब्याज राशि भुगतान कर चुके होंगे।

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अगर आपने 4 लाख का डाउन पेमेंट किया होता, तो 6 लाख रुपये को सात साल के लिए ईएमआई में बदलना होगा। ऐसे मामले में, आपको केवल 2.36 लाख रुपये का अतिरिक्त ब्याज भुगतान करना होगा। आपको अपनी जेब से कुछ ज्यादा लगाना होगा ताकि आप पर ईएमआई का बोझ बहुत अधिक न हो।

लोन की अवधि क्या हो?

लोन चुकाने के लिए लंबी अवधि रखना फायदे का सौदा लगता है, क्योंकि ऐसे में प्रति माह आने वाली किस्त बहुत कम हो जाती है। लेकिन, आप गणना करें, तो इसके चलते लोन पर कुल ब्याज बढ़ जाता है। होता यह है कि लंबी अवधि के लोन पर ब्याज दर भी ऊंची रखी जाती है, जो खरीदार को लंबी अवधि तक चुकानी होती है। उधर वक्त के साथ कार की वैल्यू कम होती जाती है। और एक वक्त ऐसा आता है कि कार की कीमत कम और लोन ज्यादा हो जाता है। आमतौर से 48 या 60 महीने का समय कार लोन चुकाने के लिए आदर्श माना जाता है।

अपने स्तर पर कर लें पड़ताल

कार खरीदने में लोन लेने के लिए डीलर की सलाह पर निर्भर करना समझदारी नहीं है। इस तरह आप अपने लिए बाजार में अन्य बैंकों या वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली बेहतर डील की संभावना को खत्म कर देते हैं। अच्छा हो कि आप बैंकों, ऋणदाता संस्थानों की ओर से दिए जा रहे प्री अप्रूव्ड लोन की स्कीम्स को भी देखें और उनकी तुलना करें। काम कार खरीदने से पहले के हैं। ताकि आप जब कार के लिए लोन का आवेदन करें, तो आपको बाजार में उपलब्ध ब्याज दरों और लोन राशि का अंदाजा हो और उसी अनुसार आप अपने लिए बेहतर विकल्प का चुनाव कर सकें।

पेनाल्टी के बारे में पता कर लें

कुछ बैंक फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट वाले कार लोन पर कार प्रीपेमेंट शुल्क लगाते हैं। इस तरह के प्रीपेमेंट चार्जेज के कारण बकाया ऋण राशि का 5-66 तक का खर्च आ सकता है। कई बैंक प्रीपेमेंट की राशि और लोन की अवधि के दौरान प्रीपेमेंट की संख्या को भी सीमित कर देते हैं। वहाँ कुछ बैंक टर्म से पहले पूरे लोन के भुगतान पर पेनाल्टी लगाते हैं। इन सभी बिंदुओं के बारे में भी जानें।

इस तरह बनाएं कार का बजट

■ अपनी वार्षिक आय का आधे से ज्यादा कार पर खर्च ना करें।

■ कार के लिए बजट का निर्णय कार की ऑनरोड कीमत से तय करें।

20/4/10 के नियम के अनुसार कार का बजट बनाएं। आदर्श स्थिति में ऑनरोड कीमत का 20 फीसदी डाउन पेमेंट के तौर पर चुकाना चाहिए। लोन की अवधि चार साल की रखें और प्रतिमाह किस्त मासिक आय की 10 फीसदी से ज्यादा ना रखें।